Tevar

तेवर | Tevar

तेवर

( Tevar ) 

 

शिकायत होने लगी है उन्हें, मेरी हर बात पर

हमने भी मान लिया, बेबात की बात में रखा क्या है

गरज थी तब, मेरी हर बात थी उनके सर माथे पर,

अब तो कह देते हैं बात में ऐसा रखा क्या है

दौलत ही बन गया पत्थर पारस ,अब जमाने में

पीतल हो या सोना सिवा नाम के और रखा क्या है

बनावट के उसूलों से ही ,जब चल रही हो गाड़ी

बेवजह तब उलझ कर, मरने में रखा क्या है

चेहरा ही देखते है,भीतर झांकता ही कौन है

यूज एंड थ्रो का जमाना है, पालने में रखा है

मोहन ये बदले हुए तेवर हैं, आज के माहौल के

यहां संस्कारों को चाटने दो धूल ,सभ्यता में रखा क्या है

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

नाता | Nata

Similar Posts

  • भारतीय संस्कृति और सभ्यता

    भारतीय संस्कृति और सभ्यता   हमारी संस्कृति है महान देवताओं का वरदान l सरलता सादगी में आता है जीना l छोटी-छोटी बातों छोटी-छोटी खुशियों की हमें कोई कमी ना। वृक्ष ,पर्वत, नदियों से है गहरा नाता l कण-कण में हमें ईश्वर है नजर आता l जहां पराया दुख अपना लगता हैl भाईचारे का रखे सबसे…

  • Hindi kavita : मेरी इच्छा

    मेरी इच्छा ( Meri ichha : Kavita )    काश हवा में हम भी उड़ते तितलियों से बातें करते नील गगन की सैर करते अपने सपने को सच करते बादलों को हम छू लेते चाँद पर पिकनिक मनाते  मनचाही मंजिल हम पाते पेड़ो पर झट चढ़ कर हम जंगली जानवरों से बातें करते पंछियों से…

  • मन का राजमहल खाली है | Man ka Rajmahal

    मन का राजमहल खाली है ( Man ka rajmahal kahan hai )   मन का राजमहल खाली है, खुशियों की बहार बनो। महका दो मन की बगिया, आकर तुम गुलजार करो। बन जाओ मन की मलिका, महलों की प्राचीर कहे। दिल का सिंहासन खाली है, आकर तुम श्रंगार करो। महक उठी है मन की वादियां,…

  • कर्तव्य पथ पर | Kavita Kartavya Path Par

    कर्तव्य पथ पर ( Kartavya path par )    मैं डट कर स्थिर खड़ी रहूँगी, कर्तव्य पथ पर निरंतर चलूंगी। किसी प्रहार से कोशिश छोडूंगी नहीं। हाथ किसी के आगे जोडूंगी नहीं, वरदान किसी भगवान से माँगूंगी नहीं।। परिस्थितियां चाहे जो कर ले, समय से मात खा कर गिरूँगी नहीं। हवायें चाहे अपना रुख मोड़…

  • नव-सभ्यता | Kavita Nav Sabhyata

    नव-सभ्यता ( Nav Sabhyata ) नव सभ्यता की मजार में फटी चादर का रिवाज है आदिम जीवन की आवृत्ति में शरमों -हया की हत्या है प्रेम-भाव के विलोपन में तांडव का नर्तन है मशीनी मानव की खोज में मां-बेटियां नीलाम है हाय-हेलो की संस्कृति में सनातन हमारी श्मशान है पछुयायी की नशे में मिजाज हमारा…

  • मोहब्बत में अंतर | Mohabbat me Antar

    मोहब्बत में अंतर ( Mohabbat me Antar ) पहले और अब में बहुत अंतर आ गया है। मिलने मिलाने का अब दौर खत्म सा हो गया है। आत्मीयता का तो मानों अब अंत सा हो रहा है। रिश्तें नाते तो अब सिर्फ टेकनालाजी से निभ रहे है।। वो भी क्या दिन थे जब चुपके चुपके…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *