अडिग | Adig

अडिग

( Adig ) 

 

किसको कहे हम खास अपना
किस पर जतायें हम विश्वास अपना
हर किसी दिल में फरेब है पल रहा
किस पर लगाएं हम आश अपना

तोड़े हैं वही जिन्हें जोड़ा था हमने
छोड़े हैं वही जिन्हें संभाला था हमने
बहाये थे आंसू हमने जिनके खातिर
वे हि कहते हैं ,उन्हें लूटा है हमने

दिल ! फिर भी, तू बेमूर्रवत ना बन
बहुत अधिक रहता नहीं यह जीवन
प्रतिसाद से कर न कुंठित अपना मन
हो सके तो सब की आंख का सपना बन

निस्वार्थ बन उड़ गगन तक
कर्म पथ पर अडिग रह जीवन तक
सौभाग्य बन जगत में प्रदीप हो
सार्थक जन्म कर फल भले संक्षिप्त हो

समझेंगे तुझे भी लोग कल
कर्तव्य निष्ठ हो रख मन शुद्ध निर्मल
करता चल तू करम अपना हो निश्छल
जीवन के बाद भी जीवन रहता है कल

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

दर्द की रेखा | Dard ki Rekha

Similar Posts

  • कुदरत | Kudrat

    कुदरत ( kudrat )    युगों-युगों से निसर्ग की दुनिया दीवानी, चलो आज लिखते हैं कुछ नई कहानी। बाँहें फैलाए खड़ी है ये कुदरत, छेड़ते हैं बातें कुछ उसकी रूहानी। अल्हड़ हवाएँ,वो उड़ते परिन्दे, जगह -जगह छोड़ी है अमिट निशानी। झीलों का देखो वो झलकता बदन, बातें बहुत हैं उसकी आसमानी। नदियों का बहना, नदियों…

  • Hindi Ghazal -चंद बुलबुले जो देखते हो पानी में तुम

    चंद बुलबुले जो देखते हो पानी में तुम   ( Chand Bulbule Jo Dekhte Ho Pani Mein Tum )   दो घडी रुककर घाव सहलाने लगे हम यूँ भी दर्द अपना भुलाने लगे तुम जो राहो में मेरी बिछाते हो शूल दामन फूलो से तुम्हारा महकाने लगे   किस्मत में था इन्तेजार वही मैं करती…

  • अतुल्य भारत | Kavita Atulya Bharat

    अतुल्य भारत ( Atulya Bharat ) अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि सर्व धर्म समभाव छटा, स्नेह प्रेम भाईचारा अनंत । विविधता अंतर एकता, जीवन शैली संस्कार अत्यंत । खेती संग खुशहाली अथाह, परिश्रमी ओज सम रवि । अतुल्य भारत, हिय प्रियल छवि ।। दक्षिणी एशिया वृहत्तर राष्ट्र, पर्यटन क्षेत्र अति उत्तम । उत्तर शोभा दिव्य…

  • बप्पा आ जाओ | Poem On Ganesh Ji

    बप्पा आ जाओ ( Bappa aa jao )   बाप्पा आ जाओ कष्ट हर जाओ झोली भर जाओ मूषक पे होके सवार घर मेरे तुम आ जाओ दस दिन रहो तुम अंगना में मेरे ओ गौरी नंदन मोदक ग्रहण कर विघ्नमेरे हर जाओ विद्या बुधि दे जाओ मन की पीड़ा हर जाओ फैली कुरीति और…

  • दो दिन की जिंदगानी | Do Din ki Zindagani

    दो दिन की जिंदगानी ( Do din ki zindagani )    दो दिन की जिंदगानी प्यारे झूठा यह संसार है। तन बदन है माटी का प्यारे सांसे सभी उधार है। चंद सांसों का खेल सारा पंछी को उड़ जाना है। ये दुनिया है आनी जानी आगे और ठिकाना है। माटी के पुतले को फिर माटी…

  • क्षितिज के तारे | Kavita

    क्षितिज के तारे ( Kshitij ke taare )   क्षितिज के तारे टूट रहे, अपनों के प्यारे छूट रहे। खतरों के बादल मंडराये, हमसे रब हमारे रूठ रहे।।   नियति का चलता खेल नया, कैसा  मंजर  दिखलाता है। बाजार बंद लेकिन फिर भी, कफ़न रोज बिकवाता है।।   मरघट  मौज  मना  रहा, सड़कों पर वीरानी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *