अडिग | Adig

अडिग

( Adig ) 

 

किसको कहे हम खास अपना
किस पर जतायें हम विश्वास अपना
हर किसी दिल में फरेब है पल रहा
किस पर लगाएं हम आश अपना

तोड़े हैं वही जिन्हें जोड़ा था हमने
छोड़े हैं वही जिन्हें संभाला था हमने
बहाये थे आंसू हमने जिनके खातिर
वे हि कहते हैं ,उन्हें लूटा है हमने

दिल ! फिर भी, तू बेमूर्रवत ना बन
बहुत अधिक रहता नहीं यह जीवन
प्रतिसाद से कर न कुंठित अपना मन
हो सके तो सब की आंख का सपना बन

निस्वार्थ बन उड़ गगन तक
कर्म पथ पर अडिग रह जीवन तक
सौभाग्य बन जगत में प्रदीप हो
सार्थक जन्म कर फल भले संक्षिप्त हो

समझेंगे तुझे भी लोग कल
कर्तव्य निष्ठ हो रख मन शुद्ध निर्मल
करता चल तू करम अपना हो निश्छल
जीवन के बाद भी जीवन रहता है कल

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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