राम | घनाक्षरी छंद

राम

घनाक्षरी छंद

( 8,8,8,7 )

 

दोऊ भाई लगे प्यारे,
बने धर्म के सहारे।
फहराने धर्म ध्वजा,
आये मेरे श्री राम।।

दुखियों के दुख टारे,
सब कुछ दिए वारे।
वचन निभाने चले,
वन को किए धाम।।

राम -राज बना आज,
पूरन हो सभी काज।
बिगड़ी बनाते यही,
रे – मन जपो नाम।।

राम-राम रटे जाओ,
प्रभु मन बसे जाओ।
मन अभिलाषा पूरी,
पूर्ण हों सब काम।।

कवयित्री: दीपिका दीप रुखमांगद
जिला बैतूल
( मध्यप्रदेश )

यह भी पढ़ें : 

मकर संक्रांति | Makar Sankranti

Similar Posts

  • दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

    दिल का बहकना ( Dil ka bahakna )   मनहरण घनाक्षरी   दिलकश हो नजारे, कोई हमको पुकारे। लगे स्वर्ग से सुंदर, महकती वादियां।   दिल दीवाना हो जाए, दिल कहीं पे खो जाए। प्रीत के तराने गाये, मन भाये शादियां।   झूम उठे तार सारे, बोल मीठे प्यारे प्यारे। दिल की धड़कनों में, बज…

  • सरसी छंद : गीत

    सरसी छंद ( Sarsi Chhand ) करते हो किन बातों पर तुम , अब इतना अभिमान ।आज धरा को बना रहा है , मानव ही शमशान ।।करते हो किन बातों पर तुम … भूल गये सब धर्म कर्म को , भूले सेवा भाव ।नगर सभी आगे हैं दिखते , दिखते पीछे गाँव ।।मानवता रोती है…

  • चंद्रयान की सफलता | Chandrayaan ki Safalta

    चंद्रयान की सफलता ( Chandrayaan ki safalta )   दुर्लभ को सम्भव किया, भारत देश महान।। चन्द्रयान की सफलता, जय जय जय विज्ञान।। जय जय जय विज्ञान, निराली तेरी माया। भारत अनुसंधान, जगत में अव्वल छाया। कहैं शेष कविराय, जियें वैज्ञानिक वल्लभ। कुशल प्रशासन नीति, मिथक तोड़े सब दुर्लभ।।   लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी” प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद…

  • रक्तदान | Raktdan par chhand

    रक्तदान ( Raktdan ) मनहरण घनाक्षरी   रक्तदान महादान, देता है जीवन दान। जीवन बचाएं हम, रक्तदान कीजिए।   आओ बचाएं सबका, जीवन अनमोल है। मानव धर्म हमारा, पुण्य कार्य कीजिए।   सांसो की डोर बचाले, जोड़े रक्त का नाता भी। जरूरतमंद कोई, रक्त दान दीजिए।   किस्मत संवर जाती, भाग्य के खुलते द्वार। परोपकार…

  • Chhand Shailputri | शैलपुत्री

    शैलपुत्री   मनहरण घनाक्षरी   शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए।   मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए।   पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए।   सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए।   रचनाकार : रमाकांत…

  • आया बसंत सुहाना | Chhand Aaya Basant Suhana

    आया बसंत सुहाना ( Aaya basant suhana )   जलहरण घनाक्षरी   आया बसंत सुहाना, उपवन महका रे। झूम झूम नाचे गाते, सारे ठहर ठहर।   फागुन की मस्ती छाई, रूत ये सुहानी आई। मधुमास महकता, आया लहर लहर।   सरसों लहलहाई, मस्त चली पुरवाई। बहार ले अंगड़ाई, चली सहर सहर।   धमालो की थाप…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *