अपनापन

अपनापन | Apnapan

निशा जी को परिचारिका बड़े प्यार से उनके कमरे में बिठाकर उन्हें सब कुछ समझाकर बाहर निकल गई। निशा जी गौर से कमरे को चारों तरफ से देखने लगीं। कुर्सी से उठकर खिड़की के पास आ गई और बाहर देखने लगीं।

बाहर बहुत सुंदर फूलों से सजा बगीचा देख उनके होंठों पर मुस्कान तैर गई। धीरे धीरे से चलते हुए कमरे का मुआयना किया और पलंग पर बैठ गईं। घर की याद आने लगी।

ऐसे ही एक कमरा और उसमें वो अकेली बैठी रहतीं थीं दिनभर। बेटा बहू अपने काम में व्यस्त रहते। पोते पोतियां पढ़ाई में यां और बहुत सी एक्टिविटीज में लगे रहते।

निशा जी को सब सुविधाएं उपलब्ध थीं। नौकर चाकर थे घर पर उनकी देखभाल के लिए। पर पति के स्वर्गवास के बाद उन्हें अकेलेपन को बांटने वाला कोई नहीं था।

सारा दिन काटने को दौड़ता। स्नान, ध्यान, पूजा पाठ के बाद भी समय कटता ही ना था। रसोई में जाकर कुछ पकाने का सोचती तो बच्चे ये कहकर वापस भेज देते कि आप आराम करो ये सब काम नौकर कर लेंगे।

कभी कभार अपनी पुरानी सहेली रीना को फोन कर लेती और घंटों बातें करती। रीना की कहानी भी लगभग निशा के जैसी ही थी। दोनों को जीवन के इस पड़ाव पर जीना मुश्किल लगने लगा था।

निशा जी ने रीना को फोन लगाया और रीना ने चहकते हुए फोन उठाया और बोली निशा मैं तुझे ही फोन लगाने वाली थी। मैंने तो अपने जीवन की खुशियां फिर सजा दी हैं। निशा जी को समझ नहीं आया रीना क्या कह रही है।

उन्होंने उत्सुकता से पूछा क्या हुआ भी हमें भी बताओ इस उम्र में कौन नया साथी मिल गया आपको । और दोनों ठहाका लगा कर हंस पड़ी। रीना बोली अरे एक नहीं कई साथी मिल गये और सब अपने जैसे जिंदगी ढूंढते हुए यहां आ पहुंचे हैं।

रीना ने बताया कि उसने ओल्ड एज होम ज्वाइन किया है और यहां सब उनके जैसे बुजुर्ग लोग इकट्ठे रहते हैं और जिंदादिली से जीते हैं।

रीना ने निशा को भी ओल्ड एज होम ज्वाइन करने की सलाह दी। रीना बड़ी देर तक निशा को यहां की दिनचर्या के बारे में बताती रही कि पूरा दिन कैसे वो बहुत सी एक्टिविटीज में संलग्न रहते हैं और बहुत एन्जॉय करते हैं।

रीना ने बताया कि वो अपनी सेविंग्स अपने लिए खर्च कर के सुख से रह रही है। फोन रखने के बाद निशा ओल्ड एज होम के बारे में ही सोचती रही।

उसने तो सुना था कि ओल्ड एज होम में बच्चे अपने तंग आए माता पिता को छोड़ देते हैं और एक भयानक सी तस्वीर की तरह जीवन जीते हैं वहां लोग। उसने जाकर रीना से मिलने का मन बनाया और अगले दिन ड्राइवर को पता बताकर मिलने पहुंच गई। यहां का माहौल देखकर निशा को बहुत खुशी हुई।

रीना ने सब साथियों से निशा को मिलाया। सबने जोश से निशा का स्वागत किया। यहां सब अपनी उम्र को भूलकर जीभर कर जी रहे थे। निशा दिनभर इनके साथ रही और देखा कि घर के कमरे में उपेक्षित पड़े रहने की तुलना में ओल्ड एज होम का जीवन अपनेपन से सारोबार था।

निशा ने घर पहुंचने से पहले ही ओल्ड एज होम ज्वाइन करने का मन बना लिया था। दो दिन बाद अपने जन्मदिन पर बच्चों से तोहफे में अपनी विदाई मांग कर ज्वाइन किया और आज अपने शेष सपने पूरा करने अपने अपनों के बीच अपनापन पाने पहुंच गई थी।

शिखा खुराना

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