Arth

अर्थ | Arth

अर्थ

( Arth )

अर्थ में ही अर्थ है
अर्थ के बिना सब व्यर्थ है।

सत्य साधना या सत्कार
सभी के लिए है यह जरूरी,
जीवन का आवश्यक यह शर्त है
अर्थ के बिना सब अनर्थ है।

सीधे मुॅंह कोई बात नहीं करता
नजर रहती सभी की वक्र है,
साज सम्मान के लिए यह जरूरी
अर्थ नहीं तो यह दुनिया लगती व्यर्थ है।

अर्थ में ही अर्थ है
अर्थ के बिना सब व्यर्थ है।

कहते हैं सब मोह माया
अर्थ में है सब समाया
मानव का कोई कार्य
बगैर इसके सम्पन्न कहाॅं हो पाया।

दुनियादारी या तारीफदारी
इसके बिना नहीं चलती यारी,
गाड़ी जीवन की खिसकती नहीं
जब हो इसकी महामारी।

अर्थ में ही अर्थ है
अर्थ के बिना सब व्यर्थ है।

अर्थ से कुर्सी अर्थ से होसियारी
अर्थ बिन न चलती जिम्मेदारी
जन्म उत्सव हो या अंतेष्टी
अर्थ की जरूरत सर्वत्र है।

अर्थ को अर्जित कर
जीवन को समृद्ध बनाएं,
सही स्थान पर व्यय कर
अपना, अपनो का मान बढ़ायें।

अर्थ में ही अर्थ है
अर्थ के बिना सब व्यर्थ है।

नरेन्द्र कुमार
बचरी (तापा) अखगाॅंव, संदेश, भोजपुर (आरा),  बिहार- 802161

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