Author: Admin

  • शिक्षा उपवन | Shiksha Upvan

    शिक्षा उपवन ( Shiksha upvan )    सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ज्ञान सहज अवबोध , प्रयोग व्यवहार धरातल । निर्माण आदर्श चरित्र, भविष्य सदा उज्ज्वल । आत्म सात कर नूतन, पुरात्तन भाव चहकता रहे सुसंस्कारों के सौरभ से, शिक्षा उपवन महकता रहे ।। शिक्षण अधिगम ज्योत, दिव्यता अप्रतिम प्रसरण । तन…

  • शिक्षक देव | Shikshak dev

    शिक्षक देव ( Shikshak dev )    शिक्षक ही है श्रोत ज्ञान का अनवरत दे रहा ज्ञान का दान बिना ज्ञान है व्यर्थ यह जीवन है यही जग मे कर्तव्य महान.. नासमझ से समझदार बनाकर शिक्षक अपना कर्तव्य निभाता आया आदर,सत्कार,सत्य,अहिंसा का भेद सदा सबको बतलाता आया…. देकर अल्प समय में ही सीख वह जीवन…

  • सांवरियो आंगणिये आयो | Rajasthani Bhasha Poem

    सांवरियो आंगणिये आयो ( Sanwariyo aanganiye aao )    सांवरियो आंगणिये आयो, जाग्या म्हारा भाग। सुखसागर बरसण लाग्यो,घट उमड़यो अनुराग। मनमंदिर म जोत जागी,घट म उजाळो दमक्यो। नैणां गिरधर री मूरत, किस्मत रो तारों चमक्यो। मिल्यो खजानों शबदां रो, सुरसत री महर होगी। सुरभित बणी केसर क्यारी, काया कंचन निरोगी। फूट पड़या गीता रां सुर,…

  • Poem On Time in Hindi | वक्त

    वक्त ( Waqt )  ( 2 )  वक्त सिखा हि देता है घरौंदे की कारीगरी झुक जाती है अकड़, भूल जाती है दादागिरी हो जाते हैं हौसले पस्त, रोज की बदनामी से टूट जाता है परिवार भी, रोज की मारामारी से उठता ही नहीं सर कभी, किसी भले के आगे पुरखे भी रहते सदमे में,…

  • बेटी उर्फ नारी | Beti urf Nari

    बेटी उर्फ नारी ( Beti urf nari )    बेटी बनकर वह बाबुल घर आई राखी बांध भैया की बहना कहलाई दादा ,दादी , ताऊ और ताई सबकी मानो थी वो सबकी एक परछाई.. फिर छोड़ पिता का घर बेटी ने दुल्हन बनकर आई पिया के संग कितने ही स्वप्न सजा आई गुड़िया लिए जोश…

  • शेरू | Sheroo

    रात्रि के 11:00 बजे की घंटी बज चुकी थी फिर भी शेर अभी हिसाब मिलने में व्यस्त था । उसे अभी-अभी चिंता सता रही थी कि कहीं होटल बंद ना हो जाए । पेट में चूहे कूद रहे थे लेकिन क्या करें पापी पेट के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ता। तभी एक ग्राहक और आ…

  • बेटी मां की परछाई | Beti Maa ki Parchai

    बेटी मां की परछाई ( Beti maa ki parchai )    मां की तरह, मीठी मीठी बातें करती। घर आंगन महका देती, नन्हे नन्हे हाथों से, ला रोटी पकड़ा देती। एक रोज जो साड़ी पहनी, मां जैसी वो लगने लगी, सच कहूं तो बिटिया मेरी, अपनी मां की परछाई है। कुछ मन का न हो…

  • जिम्मेदार कौन | Zimmedar Kaun

    एक मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति स्थापित की जा रही थी। ढोल नगाड़े बज रहे थे। साईं बाबा की मूर्ति शंकर भगवान के बगल में स्थापित करना था। ऐसे में महेश नाम के एक स्थानीय व्यक्ति ने विरोध किया। उसने कहा,-” भोले शंकर की मंदिर में साईं बाबा की मूर्ति नहीं स्थापित हो सकती…

  • रश्मिरथी | Rashmirathi

    रश्मिरथी ( Rashmirathi )    देख सखी दिनकर नहीं आए आहट सुन रश्मि रथियों ने खोली द्वारा निशाचर डींग हांक रहे थे जो वह दुम दबाकर गये भाग कल की रात्रि अति काली जो अब ना दे दिखाई सोच सखी उनके आने पर क्या क्या देगा दिखाई तेज स्वरूप- सिंहासन संपूर्ण क्षितिज सुनहरी छाई निशाचर…

  • आओ जी लें प्यार से कुछ पल | Aao Jee le Pyar se

    आओ जी लें प्यार से कुछ पल ( Aao jee le pyar se kuchh pal )   अंतस्थ वृद्धन अंतराल , निर्मित मौन कारा । व्याकुल भाव सरिता, प्रकट सघन अंधियारा । पहल कर मृदु संप्रेषण, हिय भाव दें रूप सकल । आओ, जी लें प्यार से कुछ पल ।। भीगा अंतर्मन संकेतन, जीवन पथ…