Beti Maa ki Parchai

बेटी मां की परछाई | Beti Maa ki Parchai

बेटी मां की परछाई

( Beti maa ki parchai ) 

 

मां की तरह,
मीठी मीठी बातें करती।
घर आंगन महका देती,
नन्हे नन्हे हाथों से,
ला रोटी पकड़ा देती।
एक रोज जो साड़ी पहनी,
मां जैसी वो लगने लगी,
सच कहूं तो बिटिया मेरी,
अपनी मां की परछाई है।

कुछ मन का न हो तो,
डांट लगाती,
गुस्सा भी हो जाती है।
भैया को बड़े प्यार से,
रात को लोरी सुना सुला देती।
हाथ पकड़ लिखना सिखाती,
बांहे भर स्नेह लुटाती है।
मेरी नन्ही सी गुड़िया,
अपनी मां की परछाई है।

गुस्सा होती मेरे जैसे,
मां की सूरत पाई है।
ननिहाल में सब देखते हि कहते,
लाडो की बिटिया आई है।
देखो देखो बिल्कुल मां सी,
जैसे ये मां की परछाई है।

 

© प्रीति विश्वकर्मा ‘वर्तिका

प्रतापगढ़, ( उत्तरप्रदेश )

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