सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या
इस में है फ़नकारी क्या

सब से पंगा लेते हो
अ़क्ल गई है मारी क्या

ऐंठे-ऐंठे फिरते हो
शायर हो दरबारी क्या

लगते हो भारी-भरकम
नौकर हो सरकारी क्या

जाने की जल्दी में हो
करली सब तय्यारी क्या

तोपें खींचे फिरते हो
करनी है बमबारी क्या

सबको धोखा देते हो
अच्छी है मक्कारी क्या

धीरे-धीरे खोलो जी
तोड़ोगे अलमारी क्या

सच्चे हों तो बात भी हो
झूठों की सरदारी क्या

सब ही नंगे फिरते हैं
नर ही क्या अब नारी क्या

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

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