सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या

सीखी है अय्यारी क्या
इस में है फ़नकारी क्या

सब से पंगा लेते हो
अ़क्ल गई है मारी क्या

ऐंठे-ऐंठे फिरते हो
शायर हो दरबारी क्या

लगते हो भारी-भरकम
नौकर हो सरकारी क्या

जाने की जल्दी में हो
करली सब तय्यारी क्या

तोपें खींचे फिरते हो
करनी है बमबारी क्या

सबको धोखा देते हो
अच्छी है मक्कारी क्या

धीरे-धीरे खोलो जी
तोड़ोगे अलमारी क्या

सच्चे हों तो बात भी हो
झूठों की सरदारी क्या

सब ही नंगे फिरते हैं
नर ही क्या अब नारी क्या

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • अब हम | Ghazal Ab Hum

    अब हम ( Ab Hum ) पहले अपनी इ़नान देखेंगे। फिर जहाँ का गुमान देखेंगे। सीख लें ढंग जंग के फिर हम। सबके तीर-ओ-कमान देखेंगे। पर हमारे तराशने वालो। हम तुम्हारी उड़ान देखेंगे। यह करिशमा दिखाएंगे अब हम। सर झुका कर जहान देखेंगे। हम तो कुछ कर नहीं सके लेकिन। अब तुम्हारा ज़मान देखेंगे। रंग…

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • बहुत सुन चुके

    बहुत सुन चुके बहुत सुन चुके है कि घाटा नहीं हैबहीखाता फिर क्यों दिखाता नहीं है चलो दूर कुछ और भी तुम हमारेअभी प्यार का मुझको नश्शा नहीं है तुम्हारी जुबाँ अब तुम्हें हो मुबारककभी थूक कर हमने चाटा नहीं है न देखो ज़रा तुम मेरी सिम्त मुड़करअभी तक ये दिल मेरा टूटा नहीं है…

  • मौजू सुहाने आ गये

    मौजू सुहाने आ गये वो बहाने से हमें हर दिन बुलाने आ गयेशायरी के वास्ते मौजू सुहाने आ गये इस कदर डूबे हुए हैं वो हमारे प्यार मेंउनकी ग़ज़लों में हमारे ही फ़साने आ गये अनसुनी कर दी जो हमने आज उनकी बात कोहोश इक झटके में ही उनके ठिकाने आ गये उस घड़ी हमको…

  • तितली लगती है | Ghazal Titli Lagti Hai

    तितली लगती है ( Titli Lagti Hai ) माह धनक खुशरंग फ़जा तितली लगती है पाक़ीज़ा फूलों सी वो लड़की लगती है। सौदा बेच रही है वो ढॅंक कर पेशानी बातों से ढब से सुलझी सच्ची लगती है। देख के उसको दिल की धड़कन बढ़ जाती है ना देखूं तो सांस मेरी रुकती लगती है।…

  • याद आती है आशियाने की | Ghazal Yaad Aati Hai Aashiyane ki

    याद आती है आशियाने की ( Yaad Aati Hai Aashiyane ki ) है अदा यह भी रूठ जाने की कोई कोशिश करे मनाने की इन अदाओं को हम समझते हैं बात छोड़ो भी आने-जाने की आज छाई हुई है काली घटा याद आती है आशियाने की एक दूजे को यह लड़ाते हैं नब्ज़ पहचान लो…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *