याद आती है आशियाने की | Ghazal Yaad Aati Hai Aashiyane ki

याद आती है आशियाने की

( Yaad Aati Hai Aashiyane ki )

है अदा यह भी रूठ जाने की
कोई कोशिश करे मनाने की

इन अदाओं को हम समझते हैं
बात छोड़ो भी आने-जाने की

आज छाई हुई है काली घटा
याद आती है आशियाने की

एक दूजे को यह लड़ाते हैं
नब्ज़ पहचान लो ज़माने की

आजकल हर बशर के होंठों पर
सुर्खियां हैं मेरे फ़साने की

उड़ रहे हैं परिंद जो हर सू
जुस्तजू है इन्हें भी दाने की

कौन कब तक किसी के साथ चले
किसमें ताक़त है ग़म उठाने की

प्यास इतनी शदीद है साग़र
कौन जुर्रत करे बुझाने की

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

मुसाफ़िराना है | Ghazal Musafirana Hai

Similar Posts

  • गए वो दिन | Gaye Woh Din

    गए वो दिन ( Gaye Woh Din)    अजब इस दौर में हमने शरीफों का चलन देखा I डुबो के हाथ खूं में फिर बदलते पैरहन देखा II हुई बर्बाद कश्ती जो ,वजह है ना-ख़ुदा खुद ही I उजड़ता बाग़बाँ के सामने ही ये चमन देखा II किया था नाज़ जब कहते, मिरी हर शै…

  • हम में खोकर रहो तो हम जाने | Ham Jane

    हम में खोकर रहो तो हम जाने ( Ham mein khokar raho to ham jane )   ऐसी होकर रहो तो हम जाने हम में खोकर रहो तो हम जाने साथ देने का है इरादा गर खाके ठोकर रहो तो हम जाने मन की कोई कहाँ है कर पाता करना जो कर रहो तो हम…

  • हर दिन | Har Din

    हर दिन ( Har din )    ज़िन्दगी हर दिन एक नयी चाल है इंसा दिन-ब-दिन हो रहा बेहाल है। कोई चराग बन जल रहा हर पल जाने किसका घर करे उजाल है। जो खो गया नाकामयाबी में कहीं देता कहाँ कोई उसकी मिसाल है। ख्वाहिशों का अपनी बोझ ढोते ढोते हर दिन वो कितना…

  • बिजलियां | Bijliyan

    बिजलियां ( Bijliyan ) किस क़दर रक़्स़ां हैं हाय बहरो-बर में बिजलियां।ख़ौफ़ बरपा कर रही हैं दिल-जिगर में बिजलियां। जिनकी हैबत से लरज़ता है बदन कोहसार का।बन्द हैं ऐसी तो मेरे ख़स के घर में बिजलियां। या ख़ुदा मेह़फ़ूज़ रखना , आशियाने को मिरे।वो गिराते फिर रहे हैं शहर भर में बिजलियां। क्या डरेंगे हम…

  • हैरत ही सही | Hairat hi Sahi

    हैरत ही सही ( Hairat hi Sahi ) मुझको सच कहने की आदत ही सहीहो अगर तुझको तो हैरत ही सही तंज़ और तल्ख़ी का आलम तौबाउनकी बातों में हक़ीक़त ही सही हम ज़ुबां रखते हैं मुहब्बत कीतेरे लब पे है कुदूरत ही सही दिल को भाए जो वही करते हैंदेते वो हमको नसीहत ही…

  • घर की इज़्ज़त | Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat ) यह हुनर दिल में ढाल कर रखनाघर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँकोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँअपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जायेदर्द दिल का निकाल कर रखना मैं हूँ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *