Baat ban jaye

बात बन जाए | Baat ban Jaye

बात बन जाए

( Baat ban jaye ) 

 

किसान की खेती में
मिस्त्री की रोजी में
बच्चों की खेलने की
जवान की कमाने की
भूखे को रोटी की
प्यासे को पानी की
मजदूर को दिहाड़ी की
वैज्ञानिक को खोज की
पेड़ को आक्सीजन की
लड़की की सुरक्षा की
लड़कों को सुधारने की
भैंस से दूध की
बहन से राखी की
भाई से प्यार की
मां की ममता से
बाप की समता से
विद्यालय में पढ़ाई की
सैनिक की सुरक्षा की
भारत देश में एकता की
इंसान में इंसान की
भले बुरे की पहचान
खुद की पहचान की
दुश्मन को पहचान की
अपनों में अपनों की
दिन महीने साल की
रोज़गार की
फसल की
कुंभकार को कुंभ की

 

Manjit Singh

मनजीत सिंह
सहायक प्राध्यापक उर्दू
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ( कुरुक्षेत्र )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/yaad-shayari-in-hindi/

 

Similar Posts

  • कल्पना की उड़ान | Kavita Kalpana ki Udaan

    कल्पना की उड़ान ( kalpana ki udaan )    कभी लड़को पर ना करना गुरुर, ख़्याल रखें यही एक बात जरुर। लालन-पालन करके किया बड़ा, धूम-धाम से उसकी शादी किया।। बिटियाॅं पे कोई दिया नही ध्यान, कहतें रहें घर पर है बहुत काम। मांँ के संग तुम करना सब काम, पढ़ना नहीं ये लड़की का…

  • बाइज्जत बरी | Kavita Baijjat Bari

    बाइज्जत बरी ! ( Baijjat bari ) बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में, सीबीआई की विशेष अदालत ने- फैसला दिया है; सभी 32 आरोपियों को बरी किया है। आडवाणी , जोशी साफ बच गए? इनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला- जज साहब कह गए! तो सवाल है मस्जिद तोड़ी किसने? क्या भूत पिसाच या भूकंप ने…

  • सियासत बहुत है | Siyasat Par Kavita

    सियासत बहुत है ( Siyasat bahot hai )   मेरी तालीम मुझसे कहती सियासत बहुत है… हंसती दुनिया को रुलाती सियासत बहुत हैl   कोई हमें बताए जरा हम महफूज कैसे रहे ….. भाई को भाई से लड़ाती सियासत बहुत है।   फूलों की खुशबू सा महकता जीवन अपना …. हवाओं में  जहर घोलती  सियासत…

  • प्रार्थना | Prarthana

    प्रार्थना ( Prarthana )   एक है हम सब विश्व भी एक धमनियों में बहे रक्त एक सा   जन्म मृत्यु में ना कोई भेद हैl बालपन किशोरावस्था बुढ़ापा    है उम्र के पड़ाव मे  समानता  वस्त्र बोली भाषा सिर्फ़ अलग   संस्कृति सीखने की है ललक हो जाए कहीं दुर्घटना कभी   उठाते हैं…

  • मैं | Main

    मैं ( Main )    टूटे हुए दिल की दास्तान हूं मैं उजड़े हुए चमन का बागबान हूं मैं खिले तो फुल मगर , सब बिखर गए खड़ा पतझड़ सा ,नादान रह गया हूं मैं चले तो थे सांस मिलकर कई लोग रह गया तन्हा छूटा हुआ कारवां हूं मैं बट गई मंजिले भी उनकी…

  • कन्या और दान | shadi poem in hindi

    *कन्या और दान* ( Kanya Or Daan )    जबसे बिटिया हुई सयान चिंता में है बाप की जान  नित्य  धरावे  नारी  ध्यान  जल्दी कर दो कन्यादान  घर -वर ढूढ़े फिर बाप परेशान कहां   मिले   अच्छा  मेहमान घर मिले अच्छा तो वर नहीं अच्छा बर  मिले  अच्छा तो घर नहीं अच्छा घर- वर अच्छा तब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *