Badhte Rahiye

बढ़ते रहिए | Badhte Rahiye

बढ़ते रहिए

( Badhte Rahiye ) 

 

आप देते हैं महत्व जब भी कभी किसी को
वो पहले परखता है आपकी जरूरत को

इंसानियत भी है अनमोल,इंसान के लिए
हर किसी को मुफ्त मे,लुटाया नही करते

दीजिए इज्जत भी तो ,जरूरी हो जितनी
हर किसी का हाजमा ,सही नही होता

भीड़ का माहौल है,अपने को तलाशोगे कहां
तनहा ही निकल लो,यदि चाहते हो पहुंचना

पहचानते हैं आपको,सिर्फ रिश्ते के नाम पर
और आप समझते हैं की,वो मेरा ही खून है

आप बदल तो सकते नही,धारा के प्रवाह को
आवाज लगाते रहिए ,और आगे बढ़ते रहिए

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

सुकून | Sukoon

 

Similar Posts

  • Ummeed Hindi Ghazal | Hindi Poem -उम्मीद

    उम्मीद ( Ummeed )     चले आओ कशक तुममे अगर, थोडी भी बाकी है। मैं  रस्ता  देखती रहती मगर, उम्मीद आधी   है।   बडा मुश्किल सा लगता है,तेरे बिन जीना अब मुझको, अगर  तुम  ना  मिले  हुंकार तो  ये, जान  जानी  है।   बनी  मै  प्रेमिका  किस्मत  में  तेरे,  और  कोई  है। मै  राधा …

  • नई सुबह | Nayi Subah

    नई सुबह ( Nayi Subah ) रात की चादर में लिपटा एक सपना है,तेरी राह तकता ये मन बेचैन अपना है।हर बीते पल में तेरा ही ख्याल है,सुनो दिकु, बिना तुम्हारे ये जीवन जंजाल है। तुम बिन ये सवेरा भी अधूरा सा लगता है,उजालों में भी जैसे दिल में अंधेरा बसता है।तेरी हँसी की किरन…

  • परमपिता ब्रह्मदेव | Brahma ji par kavita

    परमपिता ब्रह्मदेव ( Param Pita Brahma Dev )    सनातन धर्म के अनुसार आप है सृजन के देव, तीनों प्रमुख देवताओं में आप एक है ब्रह्मदेव। वेदव्यास द्वारा लिखें पुराण में है आपका लेख, चतुर्भुज और चतुर्मखी भगवान आप ब्रह्मदेव।।   यू तों आपका ब्रह्मदेव जग में ढ़ेर सारा है नाम, सृष्टि-की रचना करनें का…

  • राम नवमी विशेष | Kavita

    राम नवमी विशेष ( Ram navami vishesh )   अवधपुर में राम का आज अभिनंदन        जनम लियो रघुकुल में दशरथ के नंदन …..   कौशल्या ने जाया जब यज्ञ खीर खाया पुत्र रूप राम को तब ममता ने पाया दूर करने आए दशरथ का क्रंदन !! अवधपुर में राम जी का ……

  • खंडहर | Hindi kavita Khandhar

    खंडहर ( Khandhar )     खड़ा खंडहर कह रहा महलों की वो रवानिया शौर्य पराक्रम ओज भरी कीर्तिमान कहानियां   कालचक्र के चक्रव्यूह में वर्तमान जब जाता है बस यादें रह जाती है अतीत बन रह जाता है   उसे ऊंचे महल अटारी खड़ी इमारते भारी भारी समय के थपेड़े खाकर ढह जाती बुनियादें…

  • जय हो जय हो कलम तेरी | Jai ho Kalam Teri

    जय हो जय हो कलम तेरी  ( Jai ho jai ho kalam teri )    तीर और तलवार कहां कब कर पाए वह काम कभी कलमों के ताकत के आगे टिका कौन बलवान कभी   जड़चेतन में जान फूंककर पिघल पिघल स्याही लिख दी सिंहनाद सी कलम गरज कर युग की युगभावी लिख दी  …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *