बड़ी महंगाई बा | कजरी

बड़ी महंगाई बा

(कजरी)

 

जान मारत बा ढेर महंगाई पिया
बचे ना कमाई पिया ना ……
बड़ी मुश्किल बा जिंदगी बिताई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….

जितना सैया हो कमाए
उतना खर्चा होई जाए
बचे नाही रुपया अढ़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….1

महंगा होईगा धनिया मर्चा
बढ़िगा तेल जीरा खर्चा
जान मारे सब्जी और दवाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना…..2

सैया केतनों करे काज
पुरा नाही घर के साज
होवे रोज-रोज घर में लड़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….3

कैसे होए अब गुजारा
कैसे चले खाना चारा
कैसे होए लड़िकन के पढ़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना……4

 

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :-

आमिर इंडिया गरीब भारत | Amir India Garib Bharat

Similar Posts

  • चक्र जो सत्य है

    चक्र जो सत्य है कुछ भी अंतिम नहीं होता,न स्पर्श , न प्रकृति और न कविता ,बस दृष्टिकोण बदल जाता हैक्योंकि, चक्र जीवन , पवन , गुरुत्वाकर्षण काअनवरत सहयात्री बन धरा को थामे ,खड़ा है पंच तंत्र के केंद्र पर तन्हा,पूछताक्या मजहब पेड़ , पानी, धरा, पवन , आकाश का ,लिखा है किसी ने बस…

  • ऐटमी जंग | Atmi Jung par Kavita

    ऐटमी जंग! ( Atmi jung )    जंग का कोई नक्श बनाए तो उसे जला दो, बाँझ होने से इस धरती की कोख बचा लो। दुनिया के कुछ देश नहीं चाहेंगे जंग बंद हो, ऐसी सुलगती भावना को मिट्टी में मिला दो। जंग कोई अच्छी चीज नहीं दुनियावालों! उन्हें दुनिया में जीना और रहना सीखा…

  • हिंदुस्तान महान है | Hindustan Mahan hai

    हिंदुस्तान महान है ( Hindustan mahan hai )   वो है दीवाने सरहद के, वह है मस्ताने मिट्टी के l मन में उनके खोट नहीं, द्वेष नहीं कोई दोष नहीं l फौजी हिंद के रक्षक हैं, वो भारत के संरक्षक है l तिरंगा उनकी जान है, मान है स्वाभिमान है l भारत मां का ज्ञान…

  • झुंझुनू झुकना नहीं जानता है | Kavita

    झुंझुनू झुकना नहीं जानता है ( Jhunjhunu jhukna nahi janta )     रणवीर जुझारू भरी वसुंधरा सारा जहां मानता है युद्ध या अकाल हो झुंझुनू झुकना नहीं जानता है   देशभक्ति भाव भरकर रणधीर समर में रहते हैं शूरवीर रणबांकुरे नित जय वंदे मातरम कहते हैं   मर मिटने का जज्बा ले सीमा पर…

  • कब बरसी सवनवाँ | कजरी

    कब बरसी सवनवाँ टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। लुहिया के चलले से सूखेला कजरवा, ऊपरा से नीचवाँ कब बरसी बदरवा। गरमी से आवें न पजरवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप चुवेला पसीनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। ताल-तलइया,नदिया,पोखरी सुखैलीं, अपने बलम के हम गोनरी सुतऊलीं। चिरई जुड़ाई कब खोंतनवाँ, हाय, कब बरसी सवनवाँ। टप-टप…

  • होता वही भगवान को जो मंजूर

    होता वही भगवान को जो मंजूर होता वही है, हे भगवान! जो मंजूर आपको होता है। किसी के कुछ भी चाहने से, किसी के ना कुछ चाहने से, क्या होता है? होता वही है, हे भगवान ! जो मंजूर आपको होता है। हे सर्वेश्वर ! हे सर्वशक्तिमान! हे सर्व समर्थवान ! हे पालनहार !सब जग…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *