बड़ी महंगाई बा | कजरी

बड़ी महंगाई बा

(कजरी)

 

जान मारत बा ढेर महंगाई पिया
बचे ना कमाई पिया ना ……
बड़ी मुश्किल बा जिंदगी बिताई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….

जितना सैया हो कमाए
उतना खर्चा होई जाए
बचे नाही रुपया अढ़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….1

महंगा होईगा धनिया मर्चा
बढ़िगा तेल जीरा खर्चा
जान मारे सब्जी और दवाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना…..2

सैया केतनों करे काज
पुरा नाही घर के साज
होवे रोज-रोज घर में लड़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना….3

कैसे होए अब गुजारा
कैसे चले खाना चारा
कैसे होए लड़िकन के पढ़ाई पिया
बड़ी महंगाई पिया ना……4

 

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”
औराई, भदोही
( उत्तर प्रदेश।)

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