Basant kavita

बसंत | Basant kavita

बसंत

( Basant )

 

चंचल मन हिलोरे लेता, उमंग भरी बागानों में।

पीली सरसों ओढ़े वसुंधरा, सज रही परिधानों में ।

 

मादक गंध सुवासित हो, बहती मधुर बयार यहां।

मधुकर गुंजन पुष्प खिले, बसंत की बहार यहां ।

 

गांव गांव चौपालों पर, मधुर बज रही शहनाई है।

अलगोजों पर झूम के नाचे, देखो लोग लुगाई है।

 

मदमाती बयार वासंती, मन में हर्ष जगाती है।

हरियाली से लदी धरा, कोयल कूक सुनाती है।

 

मन मयूरा नाचे मधुबन, सरिताए इठलाती सी।

गांव की गौरी मधुवन में, चलती बलखाती सी।

 

चहुंओर सुंदर नजारे, कुदरत खेल दिखाती है।

भंवरों संग खिलती कलियां,बागों को महकाती है।

 

सौंदर्य में चार चांद, मदमस्त हवा का झोंका।

जीवन का आनंद वसंत, ऋतुराज बड़ा अनोखा।।

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

नसीहतें | Nasihaten Chhand

Similar Posts

  • चला जायेगा साल तेईस | Chala Jayega 2023

    चला जायेगा साल तेईस ( Chala Jayega 2023 )    चला जायेगा साल तेईस आ गया है दिसंबर दो बातें याद है मुझे एक आपकी शक्ल एक आपका नम्बर चला जायेगा साल तेईस कुछ नहीं हुआ ऐसे बीता जैसे और बीतते थे एक बदलाव आया है मुझे बाप जैसा दोस्त खोया है रविन्द्र गासो चला…

  • इंसान बनो | Insan bano kavita

    इंसान बनो ( Insan Bano : Kavita )   ये हर तरफ क्या हो गया है, क्यों हर जगह उदासी का मंजर है । लोग छोटी-छोटी बातों पर, क्यों बेवजह लड रहे हैं, हर तरफ द्वेष नफरत ही, क्यों पल रही, बढ़ रही है ।। कहीं रिश्ते में दूरियां आ रही; तो कहीं इंसानियत मर…

  • जीना है तो गेहूं छोड़ दो | Gehun Chhod do

    जीना है तो गेहूं छोड़ दो ( Jeena hai to gehun chhod do )    आज से ही सब छोड़ दो यह गेहूं की रोटियां खाना, नहीं तो यारों पहुॅंचा देगा यह सभी को सफाखाना। खा खाकर जिससे सब लोग आज बढ़ा रहें है तोंद, जीना है तो गेहूं छोड़ दो सब मानो हमारा कहना।।…

  • Badal Poem in Hindi | बादल

    बादल ( Badal )  सांसों की हाला पिलाएगा बादल, उजड़ी दुनिया बसाएगा बादल। स्वागत करेगी प्यासी ये धरती, प्रलय बाढ़ साथ में लाएगा बादल। सूख गई है जो जीवन की डाली, हरी- भरी धरा बनाएगा बादल। अमराई जागेगी बागों में फिर से, अधरों की प्यास बुझाएगा बादल। पट जाएगी फिर ऋतुओं से धरती, डालों पे…

  • हे हृदय प्रिया | Hriday Priya

    हे हृदय प्रिया ( He hriday priya )    सुंदरता में भी सुंदरतम कृति हो तुम आई हुई स्वर्ग की अनुपम छवि हो तुम ऋतुओं मे सावन सी मन भावन हो तुम प्राकृतिक सौंदर्य मे भी सर्वोत्तम हो तुम गंगा सी निर्मल,चांदनी सी धवल हो तुम मानसरोवर में जैसे खिला कमल हो तुम सुंदरता की…

  • चाहत | Chaahat

    चाहत ( Chaahat )    चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन उर तरंग नवल आभा, प्रसून सदृश मुस्कान । परम स्पर्शन दिव्यता, यथार्थ अनूप पहचान । मोहक स्वर अभिव्यंजना, परिवेश सुरभि सम चंदन । चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन ।। अनुभूति सह अभिव्यक्ति , मिलन अहम अभिलाषा ।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *