Poem on Indian constitution in Hindi

भारतीय संविधान पर कविता | Poem on Indian constitution in Hindi

भारतीय संविधान को नमन करता हूं

( Bhartiya samvidhan ko naman karta hoon )

 

गणतंत्र का वंदन करता चले लोकतंत्र सरकार
भारतीय संविधान को नमन करता हूं बारंबार

 

सर्वधर्म समभाव एकता संप्रभुता संविधान
हर नागरिक भाग्य विधाता शील राष्ट्र विधान

 

न्याय व्यवस्था कार्यप्रणाली अनूठी और बेजोड़
हर दोषी को दंड मिले कानून का मुश्किल तोड़

 

देशप्रेम की धारायें हो बैरी की हर कोशिश बेकार
मैं भारत के संविधान को नमन करता हूं बारंबार

 

जहां देश हित राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई जाती
सीमा पर तैनात सिपाही रणभेरी बजाई जाती

 

आम आदमी रहे चैन से जनता को मिले अधिकार
प्रतिभाओं की पूजा जहां प्रेम मधुर मिले व्यवहार

 

कीर्ति पताका जग लहराए दिलों में पलता प्यार
मैं भारत के संविधान को नमन करता हूं बारंबार

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बसंत | Basant kavita

Similar Posts

  • प्रियंका सौरभ की कविताएं | Priyanka Saurabh Poetry

    “मनीषा की अरदास” मत रो माँ, अब मत रो,तेरी बेटी की आवाज़ हम सब हैं,न्याय की राह पर चल पड़े,अब जाग उठा हर जन-जन है…। गूँजे धरती, गगन गवाह,अन्याय के विरुद्ध उठे निगाह।“भाग गई होगी” कहना भूल,अब टूट चुका हर झूठा फूल। मनीषा तेरी कसम हमें,लड़ेगे जब तक साँस है।न्याय की ज्वाला जलती रहे,हर दिल…

  • सत्य राम कहॉं से लाऊँ?

    सत्य राम कहॉं से लाऊँ? दशानन रावण का अहम् हुंकार ,विजय से पराजय जाता है हार,पर यह तो त्रेतायुग की कहानी,कलयुग रावणों का ही है संसार । दुष्कर्म,विवाद,द्वेष,दम्भ,दिखावट,ढूँढती कहाँ हैं राम, कहाँ है केवट?छल-कलह,दगेबाज,कपटी-व्यापार,अन्याय,अत्याचार,अनादर, बनावट। प्रत्येक साल विजयादशमी है आती,नई ऊर्जा जन-जनार्दन में है भरती,नौ दिन आदिशक्ति देवी नवरात्र पर्व,रामलीला प्रदर्शन हर्षोल्लासित करती। प्रशंसा से…

  • चित्र अभिव्यक्ति | Chitr Abhivyakti

    चित्र अभिव्यक्ति ( Chitr abhivyakti )   तेरी मेरी बस इतनी कहानी है, कुछ यादें और यमुना का पानी हैं, तू चाहे तो भुला दे कृष्णा सभी को! मेरी आंखों में तेरी सूरत सुहानी है ।। राधा मुख से यह कह ना सके, कितना प्रेम है हृदय में उसके जो प्रेम करे राधा कृष्ण से…

  • कृष्ण जन्माष्टमी | Krishna Janmashtami

    कृष्ण जन्माष्टमी ( Krishna Janmashtami )    काली घटा रात में छाई यमुना जब अपने तट आई उफन उफन वो पैर पड़त है देखो जन्मे कृष्ण कन्हाई ।। वासुदेव के आठवें पुत्र रूप में कृष्ण अष्टमी को प्रगट हुए मात पिता के संकट मिटाने श्री नारायण धरती पर जन्मे।। जन्म लिया पर देखो कैसी ,लीला…

  • नारंगी रंग | Narangi Rang par Kavita

    नारंगी रंग ( Narangi rang )   ऊर्जा और प्रेरणा देता हमें नारंगी रंग प्यारा नए सवेरे का रंग होता बदले ये जीवन धारा आदर्शवाद महत्वाकांक्षा शुभ गुणों का भंडार आकर्षण सुंदरता दर्शाता वैभव शुभ विचार मिलनसार स्नेह सूचक रंग कामदेव को प्यारा विद्या बुद्धि दया क्षमा चंचलता चित्त उजियारा चमकीला चमका देता है भाग्य…

  • बिन ठोकर के अक्ल न आती | Kavita Bin Thokar ke

    बिन ठोकर के अक्ल न आती ( Bin thokar ke akal nahi aati )    गुरु का डंडा और राह की ठोकर, दोनों दरवाजे कामयाबी खोलती। जिस जिसको भी लगा यह दोनों, उसे मंजिल तक पहुँचाकर रहती।। बदल ही जाती तकदीर सभी की, कलम फिर सरपट चलने लगती। तलाश ना करो तुम मुस्कराने की, बिन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *