Basant ritu par chhand

बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand

बसंत

 

हर्षाता खुशियां लाया,
सुहाना बसंत आया।
बहारें लेकर आया,
झूम झूम गाइए।

 

मधुमास मदमाता,
उर उमंगे जगाता।
वासंती बयार आई,
खुशियां मनाइए।

 

पीली सरसों महकी,
खिली कलियां चहकी।
फूलों पे भंवरे छाए,
प्रेम गीत गाइए।

 

प्रीत के तराने छेड़े,
मुरली की तान मीठी।
मदन मोहन बंसी,
मधुर बजाइये।

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

घूरती निगाहें | Poem ghoorti nigahen

Similar Posts

  • होली | मनहरण घनाक्षरी | Holi ke chhand

    होली ( Holi )   गोरा गोरा गाल गोरी, राधा रंग ले आओ जी, आओ खेलें संग होली, रंग बरसाइये।   फूलों की होली भावन, मत रंग लगाओ जी, रंगीलो फागुन आयो, मस्ती भर गाइये।   हंसी-खुशी मस्ती छाई, होली आज मनाओ जी, झूम झूम नाचो गाओ, त्योहार मनाइये।   ले पिचकारी रंग की, मोहन…

  • सावन सुहाना आया | छंद

    सावन सुहाना आया | Chhand ( Sawan suhana aya ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   सावन सुहाना आया, आई रुत सुहानी रे। बरसो बरसो मेघा, बरसाओ पानी रे।   बदरा गगन छाए, काले काले मेघा आये। मोर पपीहा कोयल, झूमे नाचे गाए रे।   रिमझिम रिमझिम, बरखा बहार आई। मौसम सुहाना आया, हरियाली छाई…

  • Chhand Shailputri | शैलपुत्री

    शैलपुत्री   मनहरण घनाक्षरी   शैलपुत्री वृषारूढ़ा, गिरिराज प्रिय सुता। त्रिशूलधारी भवानी, दुख हर लीजिए।   मंगलकारणी माता, दुखहर्ता सुखदाता। कमल नयनी देवी, वरदान दीजिए।   पार्वती मां हेमवती, शिव गौरी जगदंबे। यश कीर्ति वैभव दो, माता कृपा कीजिए।   सजा दरबार तेरा, अखंड ज्योति जलती। शक्ति स्वरूपा अंबे, शरण में लीजिए।   रचनाकार : रमाकांत…

  • सरसी छंद : गीत

    सरसी छंद ( Sarsi Chhand ) करते हो किन बातों पर तुम , अब इतना अभिमान ।आज धरा को बना रहा है , मानव ही शमशान ।।करते हो किन बातों पर तुम … भूल गये सब धर्म कर्म को , भूले सेवा भाव ।नगर सभी आगे हैं दिखते , दिखते पीछे गाँव ।।मानवता रोती है…

  • सूर्य अस्त होने लगा | कुण्डलिया छंद | Kundaliya chhand ka udaharan

    सूर्य अस्त होने लगा ( Surya ast hone laga )   सूर्य अस्त होने लगा, मन मे जगे श्रृंगार। अब तो सजनी आन मिल, प्रेम करे उदगार।। प्रेम करे उदगार, रात को नींद न आए। शेर हृदय की प्यास, छलक कर बाहर आए।। आ मिल ले इक बार, रात्रि जब पहुचे अर्ध्य। यौवन ऐसे खिले,…

  • दिव्य अनुभूति | Divya anubhuti | Chhand

    दिव्य अनुभूति ( Divya anubhuti ) मनहरण घनाक्षरी   साधना आराधना से, दिव्य अनुभूति पाई। त्याग तप ध्यान योग, नित्य किया कीजिए‌।   हरि नाम सुमिरन, जपो नित अविराम। राम राम राम राम, भज लिया कीजिए।   मंदिर में दीप कोई, जलाता ले भक्तिभाव। रोशन यह जग सारा, ध्यान किया कीजिए।   घट घट वासी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *