Beti ke Janam par Kavita

तेरे आने से | Beti ke Janam par Kavita

तेरे आने से

( Tere aane se ) 

 

मुंह टेढ़ा था

नाक सिकुड़ी थी

मन गिरा गिरा कर

सब उदास खड़े थे,

    तेरे आने से।

पता नहीं क्यों

इतना नफरत तुमसे!

नाखुश हो जाते हैं

भार सा लद जाता है,

  तेरे आने से।

समाज भी

सम्मान नहीं करता

मां बाप का

दुनिया की

बातें करता है

उपेक्षा करता है उनकी,

   तेरे आने से।

यह कब तक?

चलेगा,

कौन कब तक?

सुनेगा,

ये कब सुधरेंगे

समझेंगे,

दूर करेंगे ये भ्रम

देंगे सम्मान

मनाएंगे खुशियां,

  तेरे आने से।

ये जगती हैं

ये धरती हैं

ये देवी हैं

ये सृष्टि हैं,

धन्य हो जाता है

मां की कोख

  तेरे आने से।

अब तुम्हें

आगे आना होगा

समाज से

लड़ना होगा

यह दिखाना होगा कि

सब कुछ

बदलेगा,

 

  तेरे आने से।

 

तू कोई पाप नहीं

तू कोई अपराध नहीं

तू कोई विवाद नहीं

तू कोई विषाद नहीं

तू आज है

तू कल है

तू परिणाम है

तू फल है

सच में

धन्य हो जाती है

यह धरती,

तेरे आने से। तेरे आने से। तेरे आने से।

 

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

यह भी पढ़ें :-

नर से नारायण | Nar se Narayan

Similar Posts

  • सुहाना सपना | Suhana Sapna

    सुहाना सपना ( Suhana sapna )    मेरा बॉस मुझे घर छोड़ने आया, उसने था मेरा ब्रीफकेस उठाया। सब्जी का थैला बीवी को थमाया, सैलरी का चेक भी उसको बताया। बीवी ने झट मुझे कुर्सी पे बिठाया, फ्रिज से ठंडा पानी ला के पिलाया। प्यार से मेरे माथे को था सहलाया, हाथों से मेरे पैरों…

  • अर्थ हीन | Arth-Heen

    अर्थ हीन ( Arth-Heen )    एक स्त्री के लिए अच्छा घर,अच्छा पति अच्छे बच्चे, सास ससुर और ,एक अच्छी खासी आमदनी भी तब,किसी काम की नही होती जब, उस पर लगा हो बंदिशों का पहरा किसी से भी बात न करने की मनाही उठती हुई शक की नजरों के साथ हर बात पर व्यंग…

  • अनुपम खेर | Anupam Kher par kavita

    “अनुपम” खेर ( Anupam Kher )  –> क्या उपमा दूँ मैं “अनुपम” की …….|| 1. हैं अनुपम जी खुशहाल बडे,इन्डस्ट्री मे नाम अमर उनका | सूट करे किरदार कोई भी,आवाज बुलंद हुनर उनका | है सिर पर हांथ माँ दुलारी का,आशीष सदा बरसाती है | खट्टी-मीठी सी नोक-झोंक,सबके मन को हर्षाती है | –> क्या…

  • माँ के साथ | Maa ke Sath

    माँ के साथ ( Maa ke sath )    देख लो ढूंढ लो कोई दिख जाए तो दिखा देना, इक माँ जैसा कोई दूजा मिल जाए तो बता देना! नहीं चाह रखती है कभी माँ हमारे पैसों की, हो सके तो थोड़ा समय माँ के साथ बिता देना। मैं जानता हूँ भाई बहुत ही बिजी…

  • एक रंग मेरा भी

    एक रंग मेरा भी हवााओं में गुलाल एंव अबीर की खुशबु थी lसर पर भी होली की मस्ती खुमारथी ll सड़कों के उत्साह में हरा और केसरी कहाँ था lलगता है , यह भारत का नया दौर था ll महीनों से हो रही थी , होली की तैयारी lहर घर की चर्चा थी , अब…

  • करगिल जंग | Kargil Jung

    करगिल जंग! ( Kargil Jung )   युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *