बेटियॉं

Hindi Kavita on Betiyan -बेटियॉं

बेटियॉं

( Betiyan )

 

पढ़  रही  हैं बेटियॉं, बढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

रोज नये कीर्तिमान, गढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

 

 

बेटियॉं नहीं दुख की, नीर भरी बदरी है,

बेटियॉं नहीं कोई, आफ़त की गगरी है।

 

 

 

बेटियॉं  श्रृंगार और,सृजन की गठरी है,

ऊंची-ऊंची सीढ़ियां,चढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

 

 

पढ़ रही हैं बेटियॉं, बढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

 

है कौन सी जगह,जहां गई नहीं बेटियॉं।

कौन सी किताब जिसे,पढ़ी नहीं बेटियॉं,

 

 

 

कौन सी है नौकरी, जो करी नहीं बेटियॉं,

सरहदों पर दुश्मनों से , लड़ रहीं बेटियॉं।

 

 

 

पढ़ रही हैं बेटियां, बढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

 

बेटों से किसी मायने में कम नहीं हैं बेटियॉं,

अब  किसी  के वास्ते ग़म नहीं हैं बेटियाॉं,

 

गगन,सिंधु,ज़मीं में भी जम रही हैं बेटियॉं,

दकियानूसी  को  थप्पड़ें, जड़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

पढ़  रही  हैं  बेटियॉं,  बढ़ रहीं हैं बेटियॉं।

 

✍️

कवि बिनोद बेगाना

जमशेदपुर, झारखंड

Similar Posts

  • निपुण मिशन की ज्योति जलाएं | Nipun Mission par Kavita

    निपुण मिशन की ज्योति जलाएं  ( Nipun mission ki jyoti jalayen )    निपुण मिशन की ज्योति जलाएं आओ शिक्षा अभियान चलाएं।   अभिभावक संग मिल शिक्षक हम गढ़  भविष्य  बच्चों  का  उत्तम   बेहतर  भाषा  अंक    सिखाकर भारत  को  फिर  निपुण  बनाकर,   सरकार  की  मंशा  सफल  बनाएं निपुण मिशन की ज्योति जलाएं।…

  • सूझबूझ | Soojh – Boojh

    “माँ, तुम मंदिर जाती हो न?” सुधीर ने अपनी मांँ से सवाल किया। ” हांँ, जाती तो हूँ।” मांँ ने अपने बेटे के पूछे सवाल का जबाब दिया। “तब, धर्म और अधर्म ये दोनों कौन हैं? जिनके नारे जय और नाश के लिए लगाए जाते हैं।” सुधीर की बातें मां को अच्छी नहीं लगी फिर…

  • कविता | Kavita par kavita

    कविता ( Kavita )   युगो युगो से कविता महकी सदियों अलख जगाई दिलों तक दस्तक दे जाती शब्द सुधा रस बरसाई   भावों की बहती सरिता काव्यधारा बन बह जाती जनजागरण जोत जला उजियारा जग में फैलाती   प्रेम की पावन गंगा सी सद्भावों की अविरल धारा देशप्रेम जन मन जगाती हरती मन का…

  • वक्त के साथ | Waqt ke Sath

    वक्त के साथ ( Waqt ke sath )   अजीब सा चला है दौर आज का लोग तो पहले गम भी बांट लेते थे अब तो खुशियों मे भी शरीक होने का वक्त रहा नहीं बदल गया आशीष भी शुभ कामना का बदल गया सुबह शाम का सम्मान भी आया दौर गुड मॉर्निंग, गुड नाईट…

  • यह नवल वर्ष

    यह नवल वर्ष यह नवल वर्षमन में भर देउत्साह और हर्षघटे निराशाओं का तमहों कामयाब हम स्वार्थ का दैत्यकभी छल न सकेअब मंथराकोई चाल चल न सके आशाओं के कँवल खिल जायेंनिर्धारित लक्ष्य मिल जायें हर स्वप्न संपूर्ण होकामना परिपूर्ण हो सुदृढ़ और विश्वास होसार्थक हर प्रयास हो उदय ज्ञान का आदित्य होप्रफुल्लित निरन्तर साहित्य…

  • उम्मीद | Ummeed

    उम्मीद ( Ummeed )    उम्मीद आसरा है, सहारा है, बल है उम्मीद उत्तर है, रास्ता है, हल है उम्मीद ज़िगर है, करेजा है, दिल है उम्मीद मूल है, ब्याज है, हासिल है उम्मीद बंधन है, जुड़ाव है, लगाव है उम्मीद परीक्षा है, फल है, दबाव है उम्मीद मंजिल है, ख़्वाब है, कामना है उम्मीद…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *