हाइकु- ऋतुराज बसंत

Haiku in Hindi || हाइकु- ऋतुराज बसंत

हाइकु- ऋतुराज बसंत

( Haiku- Rituraj Basant )

 

मनभावन
ऋतुराज आ गया,
मन बहके।

नवपल्लव
लहरत पादप
रंग-बिरंग।

सरसो फल
हो गये सुनहरी
आम्र बौराए।

कोयल कूके
चहका चहकत
मदनोत्सव।

सजनी गावे
फागरस के गीत
सजना संग।

☘️

लेखक: त्रिवेणी कुशवाहा “त्रिवेणी”
खड्डा – कुशीनगर

यह भी पढ़ें :

होगा निश्चय सबेरा

Similar Posts

  • गुरू | Guru

    गुरू ( Guru ) गुरू महान~ उनके चरणों में सारा जहान ● गुरू ही सार~ बिन गुरू लगता जग असार ● गुरू वंदन~ गुरू त्याग की मूर्ति गुरू चंदन ● गुरू ही आस्था~ प्रभु से मिलने का गुरू ही रास्ता ● गुरू प्रमाण~ जीवन सार तत्व गुरू ही प्राण ● निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह…

  • मां दुर्गा के पंचम स्वरूप स्कंदमाता

    स्कंदमाता : हाइकु जगदंबिकादुर्गमा स्कंदमाताशरणागता दुर्गा भवानीस्कंदमाता अंबिकानम: चंद्रिका नौ नवरात्रिपूजन फलाहारअंबे के द्वार नौ दुर्गा रूपपंचम् स्कंदमातासुखप्रदाता षष्टमुखम्कार्तिकेय ललनशिरस: नमन रजनी गुप्ता ‘पूनम चंद्रिका’ लखनऊ, उत्तर प्रदेश यह भी पढ़ें:-

  • बसंत हाइकु | Basant par Haiku

    बसंत हाइकु ( Basant Haiku )    १. कोयल गायें, सरसों लहलायें बसंत आये !! २. सरसों छाये, ओढ़े पीली चादर, खेत मुस्काये !! 3. बागों में शोर लदने लगे जब, आमों पे बौर !! ४. नई डालियाँ, बसंत ने खिलाई नई कलियाँ !! ५. बसंत कवी, मीठी धूप सृजन कराये रवि !! डी के…

  • तेरी ये बातें

    तेरी ये बातें ( हाइकु )   1 तेरी ये बातें है झुठे सनम ये तेरे वो वादे   2   देखी है रोज़ मैंनें तो ए  सनम तेरी ही राहें   3   दिया है दग़ा प्यार में ही निकली दिल से आहें   4   गुम कहीं वो ढूंढ़ती है उसको रात दिन…

  • निर्मल जैन ‘नीर’ के हाइकु | Nirmal Jain ke Haiku

    विश्व जनसंख्या दिवस बदलो सोच~बढ़ती जनसंख्याधरा पे बोझ●रोज सताती~कल की चिंता हमेंखूब रूलाती●गम ही गम~घटते संसाधनआँखे है नम●बुरा प्रभाव~शिक्षा,स्वास्थ्य,खानाहुआ अभाव●भूल न जाओ~जनसंख्या अंकुशखुशियाँ पाओ● नशा सदैवध्यान रखनाधूम्रपान है निषेधकभी मतकरना●बातरखना यादतम्बाकू गुटखे सेजीवन होताबर्बाद●नशाबहुत बुराखाँसी, दमा, कैंसररहे जीवनअधूरा●नशामुक्त समाजहम सबने मिलकरलिया संकल्पआज योग दिवस योग की माया~पहला सुख होतानिरोगी काया•स्वच्छ हो मन~नियमित योगा सेस्वस्थ हो…

  • बाढ़ विभीषिका | Baadh Vibhishika

    बाढ़ विभीषिका ( Baadh Vibhishika ) नदी उफान~ बाढ़ की विभीषिका डूबे मकान ● मूसलाधार~ झुग्गी-झोपड़ियों का कहाँ आधार ● हुई है भूल~ ताश के पत्तों जैसा ढहता पुल ● जीवन त्रस्त~ अथाह जल राशि हौसले पस्त ● हे!कद्रदान~ नदी से नदी जोड़ो है समाधान ● ————— निर्मल जैन ‘नीर’ ऋषभदेव/राजस्थान यह भी पढ़ें :-…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *