हाइकु- ऋतुराज बसंत
हाइकु- ऋतुराज बसंत

हाइकु- ऋतुराज बसंत

( Haiku- Rituraj Basant )

 

मनभावन
ऋतुराज आ गया,
मन बहके।

नवपल्लव
लहरत पादप
रंग-बिरंग।

सरसो फल
हो गये सुनहरी
आम्र बौराए।

कोयल कूके
चहका चहकत
मदनोत्सव।

सजनी गावे
फागरस के गीत
सजना संग।

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लेखक: त्रिवेणी कुशवाहा “त्रिवेणी”
खड्डा – कुशीनगर

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