भारत के लाल | Bharat ke lal

भारत के लाल

( Bharat ke lal )

 

मत लूटो कोई देश की दौलत,
बल्कि नेता सुभाष बनों।
राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह,
लाला लाजपत राय बनों।

मंगल पाण्डेय, झाँसी की रानी,
ऊधम सिंह, आजाद बनों।
अशफाकउल्लाह, अवध बिहारी,
रोशन, बिस्मिल, राजेंद्र बनों।

शौर्य, पराक्रम से भरी हुई हैं,
देखो, अनंत कथाएँ।
स्वतंत्रता के उस महायज्ञ में,
कितने शीश चढ़ाए।

अमर हुए ये भारत के लाल,
सादर इनको नमन करो।
करे घुसपैठ चमन में कोई,
सीधे उसका दहन करो।

बने देश यह महाशक्ति,
थोड़ा तुम भी कष्ट सहो।
राम कहो या कहो रहीम,
जय-जय हिंदुस्तान कहो।

भारत माँ की आँखों में तू,
नमी कभी न आने देना।
दुश्मन सारे दहलें तेरा,
मिट्टी में उन्हें मिला देना।

सुनों, युवाओं देश तुम्हारा,
पूर्ण व्योम में छा जाओ।
बनकर सूरज डाली-डाली,
गुल तो नया खिला जाओ।

नदियों खून बहा है तब,
देश को मिली आजादी।
आबो-हवा पुरानी बदलो,
न भूलो पटेल, तुम गांधी।

मीठी निगाह से देखो सबको,
मजहब आड़े न आए।
इल्म-ओ-हुनर फैलाओ सबमें,
हर कोई लुफ्त उठाए।

परचम तरक्की का लहरे,
मोहब्बत की पौध लगाओ।
लहू -जिगर से सींचो इसको,
अमन का फूल खिलाओ।

कोयल, बुलबुल, सोन चिरैया,
बागों में गीत सुनाए।
जब शाम को लौटें सारे परिन्दे,
डाल बदन लचकाए।

सोए पहाड़ बर्फ के ऊपर,
आकर रात सुलाए।
नरम उँगलियों के पोरों से,
सोई तलब जगाए।

फागुन का मौसम जब आए,
बिन रंगे लौट न जाए।
अदावत रहे न कहीं किसी से,
सबको गले लगाए।

आजादी की उन राहों में,
जो फाँसी का फंदा झूले।
सब कुछ अपना दांव लगाए,
हम उनको कभी न भूलें।

किस मिट्टी के वो बने हुए थे,
क्या थे वो दीवाने।
पाते ही कुर्सी आज के नेता,
लगते घर चमकाने।

 

Ramakesh

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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