Bhole baba bam bam

भोले बाबा बम बम | Bhole baba bam bam

भोले बाबा बम बम

( Bhole baba bam bam )

 

अगम अगोचर अविनाशी शिव शंकर भोलेनाथ
जगतपति जगपालन कर्ता विघ्नहर्ता विश्वनाथ

 

शंकर बाबा डमरू वाले हे नीलकंठ नटराज
भोले बाबा खोल पलकिया पूर्ण कर दो काज
भोले बम बम भोले बम बम

 

हे कैलाशी हे सुखराशि हे अंतर्यामी घट घटवासी
सकल विश्व के पालनहारे भोलेनाथ सबके सहारे

 

हाथों में त्रिशूल विराजे जटा में बाबा गंगा साजे
भंग धतूरा बाबा को भाये बैठ समाधि धूनी रमाये
भोले बम बम भोले बम बम

 

सबकी पीड़ा हरने वाले हृदय आनंद करने वाले
तेरी लीला तू ही जाने नीलकंठ स्वामी रखवाले

 

गौरी के भरतार भोले हे लंबोदर पिता महाराज
सकल सृष्टि को नाच नचाए भोले बाबा नटराज
भोले बम बम भोले बम बम

 

भस्म रमाये ध्यान लगाए भोले बाबा महादेव
आया सावन उमड़ घुमड़ हे सब देवों के देव

 

बिल्वपत्र जल दुग्ध चढ़े हर हर महादेव नारा
गले सर्प की माला भोला शंकर सबका प्यारा
भोले बम बम भोले बम बम

 

नित्य ध्यान धरे शिव का संकट हर ले सारे
दीनदयाल दया के सागर भोलेनाथ हमारे

 

कृपा सिंधु करुणा बरसाते जीवन में अनुराग
महादेव की पूजा कर लो भव भय जाते भाग
भोले बम बम भोले बम बम

 

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

कच्चे मकान बरसाती रातें | Poem kache makan

Similar Posts

  • Kavita | थप्पड़

    थप्पड़ ( Thappad ) *** उसने मां को नहीं मारा मार दिया जहान को अपनी ही पहचान को जीवन देने वाली निशान को। जान उसी की ले ली, लिए गोद जिसे रोटियां थी बेली। निकला कपूत, सारे जग ने देखा सुबूत। हो रही है थू थू, कितना कमीना निकला रे तू? चुकाया न कर्ज दूध…

  • नवरात्री के नौ दिवस | Navratri ke Nau Divas

    नवरात्रि के नौ दिवस ( Navratri ke nau divas ) नव दुर्गा नव रात्रे में माँ, तू नौ रूप में है दिखती।जन-जन की आस्था का बन केंद्र, सबके उर में है सजती।। नव रात्री के नौ दिवस माता, हम चरणों में माथ नवाते।रात रात भर कर जगराते, उर में भक्ति भाव उपजाते।। द्वितीय दिवस का…

  • अपनों की अहमियत | Apno ki Ahmiyat

    अपनों की अहमियत ( Apno ki ahmiyat )    मां का प्यार, और पापा का सर पे हाथ होता है, तो जिन्दगी की जंग बड़ी आसान हो जाती है। दिन भर बाहर रहकर जब घर पहुंचती हूं, नजरे सबसे पहले मां को ही ढूंढती हैं। घर की जिम्मेदारियां हमें मजबूर बनाती है। घर से निकाल,…

  • आर या पार | हास्य कविता

    आर या पार ( Aar ya paar )   बीवी का जन्मदिन था यार, मेरे लिए था बड़ा त्यौहार। लेकिन जन्मदिन इस बार , लाया संग मुसीबत अपार। देना था मुझे उसे उपहार, लेकर आया मैं एक हार। आ रहा है तुम पर प्यार, इसको तुम पहन लो यार। देख हाथ में हीरो का हार,…

  • दुर्गा माता रानी तू ही भवानी | Durga mata par kavita

    दुर्गा माता रानी तू ही भवानी (Durga mata rani tu hi bhawani)   आदिशक्ति हे मां काली, ढाल खड्ग खप्पर वाली। सिंह सवार मां जगदंबे, दुखड़े दूर करने वाली। असुर संहारिणी ज्वाला, तू ही पर्वत निवासिनी। दुर्गा माता रानी, तू ही भवानी।   सजा दरबार निराला, रणचंडी शक्ति स्वरूपा। कमल नयनो वाली, माता का रूप…

  • बड़े ख्वाब | Bade Khwaab

    बड़े ख्वाब ( Bade Khwaab ) अक्सर मैंने बड़े हीख्वाब देखे हैं,परन्तु ,बहुत से गुमनामदेखे है,ये भी देखा है,कि कहाँ ईश्वर है,कहाँ फ़कीर खाली है,मैंने उन पदचिन्हों केभी निशान देखे है।किस तरफ रूख करूँ अपना,चलने से पहले सैकड़ों सवालदेखे है।जवाब कहाँ से पाती,कहीं कोई निशान नही उनका,ये समझ आ गयाजिम्मेदारियों तलेसभी ख्वाब टूटते भी देखे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *