Kavita | भोलेनाथ
भोलेनाथ
( Bholenath )
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हो नाथों के नाथ
हो अनाथों के नाथ
दीनों के नाथ हो
हीनों के नाथ।
बसे तू कैलाश,
बुझाते सबकी प्यास।
चराचर सब हैं तेरे संग,
रहे सदा तू मलंग ।
चलें खग पशु प्रेत सुर असुर तेरे संग,
देख देवी देवता किन्नर हैं दंग।
है कैसा यह मस्त मलंग?
ना शिव / ईश्वर का है तनिक इसमें घमंड।
नृत्य करें एक पग तांडव,
कांपे आसुरी बंधु बांधव।
कहलाएं नटराज,
यही आपकी महानता का राज।
अंदाज अनोखा अद्वितीय,
गौरा के हैं ये प्रिय;
बसें सदा उनके हिय।
जग पालनकर्ता विघ्नहर्ता-
शंभू तू त्रिशुलधारी त्रिपुरारी,
भांग सेवन है आपको प्यारी।
जटा विराजे गंगा,
है माथे पर चंदा।
गले में माला नाग विषधारी,
पहचान तेरी यही अविनाशी।
देवाधिदेव कहलाते हो,
सुन दुखियों की पुकार तुम आते हो।
ले एक लोटा जल,
देते हो मनोवांछित फल;
बनाते सबका सुंदर सुनहरा कल।
जय भोलेदानी,
क्षमा करना कोई हुई हो नादानी।
लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर
सलेमपुर, छपरा, बिहार ।
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