कविताएँ

  • जन्म दिवस

    जन्म दिवस ( शुभ जन्म दिन शनिवार 8 फरवरी ) जन्म दिवस विनोद भूरा का,मंगलमय हो ईश lवह तो नित उन्नति करें,दया करो प्रकृति ll जन्म दिवस के साथ ही,खुशियां रखिये खूब lधीरे-धीरे ही मिले,मन माफिक महबूब ll सदा स्वस्थ सुन्दर रहें,प्यारे समाज सेवी विनोद भूरा lउनसे ही उत्तम बने,ईश्वर हर परिवेश ll प्यारा प्यारा…

  • प्रपोज़ डे

    प्रपोज़ डे तेरी आँखों में जो प्यार झलकता है,वही मेरी रूह तक महकता है।हर धड़कन में तेरा ही नाम बसा है,दिकु, तू ही मेरा पहला और आखिरी किस्सा है। सांसों में खुशबू है तेरे एहसास की,हर शाम है मेरी अब तेरी तलाश की।आज जुबां पर वही बात ले आया हूँ,जिसे सदियों से दिल में दबाया…

  • प्रकृति और मानव की उत्पत्ति

    प्रकृति और मानव की उत्पत्ति प्रकृति की गोद मेंमानव की उत्पत्ति हुई।पेड़-पौधों की छाया में मानव का बचपन बीता।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को आकर्षित किया। प्रकृति की शक्ति नेमानव को मजबूत बनाया।प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन का आनंद दिया।प्रकृति की गोद मेंमानव ने अपने जीवनकी शुरुआत की। प्रकृति की सुंदरता नेमानव को जीवन काप्रकृति…

  • निर्मल कुमार दे की कविताएं | Nirmal Kumar Dey Poetry

    रिटायरमेंट जिंदगी के सफ़र मेंकई पड़ाव आते हैंबचपन जवानी औेर बुढ़ापासबको मालूम है।एक पड़ाव है रिटायरमेंटउसकी चर्चा हम कहाँ करते है?साठ के बाद बाकी सालहम यूहीं क्यों जाने दें?अपनी ऊर्जा,अपनी ताकतक्यों हम बर्बाद करें?मन में रख विश्वाससही चिंतन के साथऐसा कुछ काम करेंखुद को मिले संतुष्टिदूसरों को भी लाभ मिले। सरस सावन वसुधा अब सरस…

  • मैं नदी का शोर हूँ

    मैं नदी का शोर हूँ ( पूर्णिका ) मैं नदी का शोर हूँ मैं हूँ परिंदों का बयान, काट सकते हो अगर तो काट लो मेरी ज़ुबान। मैं अगर मिट्टी महज़ होता दफ़न आसान था।मैं हवा हूँ, रोशनी हूँ छेंक लूंगा आसमान । बिक रहे हैं ख़ुशनुमा नक़्शे खुले बाज़ार मेंखेत में उगता नहीँ हंसता…

  • सुमित मानधना ‘गौरव’ की कविताएं | Sumit Mandhana Poetry

    इस खत को कब से संभाल कर रखा था। आज आपका विश्व पत्र लेखन विषय मिलने के बाद यह खत आपके मंच पर साझा रहा हूँ .. हम सभी के चहेते, कवियों के प्रणेता और बहुत ही सुप्रसिद्ध कवि एवं एक्टर शैलेश लोढ़ा जी की बहुत ही फेमस कविता है, सच-सच बताओ ना यार मिस…

  • जीवन समय

    जीवन समय जीवन का पहिया चलता रहता है,समय का पहिया घूमता रहता है।यूं तो इंसान के पास भी पहिए होते हैं,कभी गाड़ियों में,कभी विचारों में,कभी भाग्य में भी। तुमसे भी तेज़ दौड़ते समय के पैर नहीं होते,पैरों का लेकिन समय होता है। तुमसे छीनते समय, समय के हाथ भी नहीं होते,हाथों का लेकिन… तो, क्यों…

  • आनंदा आसवले की कविताएं | Ananad Asawle Poetry

    बढ़ना सीखो लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो।रुकना मत तूम राहों में अब,हर मुश्किल से लड़ना सीखो।।धृ।। काग़ज़ पे उतरे ख्वाब जो तेरे,उन्हें हकीकत बनाना सीखो।हर गिरने को सीढ़ी समझकर,मंज़िल तक जाना सीखो।।१।। लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो….. थोड़ा दर्द, थोड़ा सुख होगा,हर रंग में जीना सीखो।आंधी आए या हो तूफ़ाँ,जैसे दीपक,…

  • प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी की कविताएं | Prabhat Sanatani Poetry

    वादे पे वादा अब वो वादा तो करती है पर भूल जाती है,अब उसे मैं नहीं कोई और याद आता है।उसकी मुस्कान अब हम पर मुस्कराने लगी है,उसके मुस्कान में अब और कोई नजर आता है।। अब वो बात नहीं रही हमारे और उसके बीच में,जो हमेशा मुझे ही हर पल याद किया करती थी।उसकी…

  • विवाह संस्कार

    विवाह संस्कार सात फेरे लेकर हम दोनों मिले,एक दूसरे के साथ जीवन का संगम बनाएं,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकले। विवाह के बंधन में बंधने से ना डरें,एक दूसरे के साथ जीवन की यात्रा पर चलने का वचन दें,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकलने का वचन दें। सात फेरे लेकर हम…