कविताएँ

  • प्रकृति का मानवीकरण

    प्रकृति का मानवीकरण प्रकृति की गोद में हम रहते हैं,उसकी सुंदरता से हमें प्रेरणा मिलती है,की उसकी शक्ति से हमें जीवन मिलता है। प्रकृति की हरियाली में हम खो जाते हैं,उसकी ध्वनियों में हमें शांति मिलती है,की उसकी सुंदरता में हमें आनंद मिलता है। प्रकृति की शक्ति से हमें प्रेरणा मिलती है,उसकी सुंदरता से हमें…

  • प्रकृति हूं मैं कदर करो

    प्रकृति हूं मैं कदर करो जल मैं, अग्नि मैं, वायु मैं ।वृक्ष,जीव,प्राणी, अचल हूं मैं ।। स्वर्ग का द्वितीय रूप मैं ।ईश्वर का महा चमत्कार मैं।। मनमोहक सा दिखता हूं ।मनमोहित मैं करता हूं ।। जिधर देखो , उधर हूं मैं ।हर तरफ हर जगह हूं मैं ।। चंद्र मैं , सूर्य मैं , भू…

  • मस्त मद में बसन्त-सन्त है सखी

    मस्त मद में बसन्त-सन्त है सखी आ रहा बसंत बसंतपुर से सखी, मन मस्त जोशीले कसक में सखी, पुराने गमगीन पत्तों का यूँ गिरना! नये सुकून की खुशली है सखी। मधुर मधुर हवा मंद-मंद ठण्डक, गुलाबी मौसम, बॉंधती गण्डक, लुभावन दिन और शीतल रात सखी, नये सुकून की उल्लास है सखी । होली सी रंग-बिरंगी…

  • आभा गुप्ता की कविताएं | Abha Gupta Poetry

    श्री गणेश श्री गणेश, प्रथमेश, गजानन,करूँ तुम्हारे चरण मे वंदन,करते दूर दुखियों के क्रंदन,तन, मन, धन हम करें समर्पन, हे शिव पुत्र, पार्वती दुलारे,धन्य नयन दर्शन से तिहारे,जब तेरा हम नाम पुकारें,कट जाऐ सब विघ्न हमारे,कर जोड़ नमन कर जोड़ नमनचरणों में नमन करती हूँ,श्री गणेश, प्रथमेश, गजानन,करूँ तुम्हारे चरण मे वंदन, मूसक वाहन मे…

  • वंदन माता शारदे

    वंदन माता शारदे प्रफुल्ल ज्ञानरूपिणी, प्रवीण मातु शारदे।विधायिनी सुवादिनी, सरस्वती उबार दे।। निरंजना प्रभामयी, महाश्रया सुवासिनी।सुपूजितां महाभुजा, मनोरमा सुभाषिनी।।करें प्रणाम श्रीप्रदा, प्रबुद्ध भारती सदा।उतारते प्रियंवदा, सुजान आरती सदा।।सुबोध माँ प्रशासनी, सुभक्ति माँ अपार दे। अकूत शास्त्ररूपिणी, करो कृपा महाफला।अनंत प्रेम दायिनी, सुहासिनी महाबला।।नमो दयालु शारदे, स्वयंप्रभा दिवाकरी।प्रशस्त मातु पंथ भी,सुखारिणी सु-अंबरी।।पयोधि ज्ञान दायिनी, नमामि माँ…

  • डॉ. चंद्र दत्त शर्मा की कविताएं | Dr. Chander Datt  Sharma Poetry

    रक्तदान – रागनी तरज मानी नी माई मुंडेर… रक्तदान तै बड़ा दान ना, सबने न्यूं समझा दयो।18 वर्ष की उम्र हुवे जब परोपकार मैं ला दयो ।।भाइयों रै, सजनों रै…. भाइयों रै, सजनों रै….। आदमी का दुनिया मैं ना सदा एक-सा बख्त होवैघायल हो या कोए बीमारी संजीवनी यू रक्त होवैबख्त होवै जब काम आण…

  • डॉ. सुनीता सिंह ‘सुधा’ की रचनाएँ | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

    गणेश पूजन है! श्री गणेशाय नमःछंद-मनहरण घनाक्षरी शिव शक्ति के हैं प्यारे, जगत भर में न्यारे,गजानन गणेश को,हमारा नमन है ! गणपति सुखकर्ता, भव बाधा सब हर्ता,एकदंत चरणों में,सदैव वंदन है ! रिद्धि सिद्धि के है पति, देते सबको सन्मति,बुद्धि यश प्रदाता वो,पार्वती नंदन है ! प्रतिदिन सेवा करूँ , वियानक का ध्यान धरुँ,कामिनी करती नित,गणेश…

  • मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो

    मॉं शारदे, विद्या, विवेक मान दो माँ शारदे, विद्या विवेक मान दो,मुझे सुर साम्राज्ञी जैसी तान दो।मेरा वाचन दिव्यमयी हितकारी हो,माँ शारदे, ब्रह्माणी ये वरदान दो।टेक। मेरे सिर-माथे वरद हस्त रख दो,सुमन शब्द-अक्षर ज्ञान-मख दो।प्रतिभा स्वयं,पर अल्पज्ञ मूरख हूँमाँ-कल्याणकारी शुभम कर दो ।पूजा अर्चन करूॅ तेरी आराधना,नारियाँ हों सशक्त,स्वाभिमान दो।माँ शारदे विद्या विवेक मान दो,मुझे…

  • श्रुत स्तुति | सरस्वती वंदना

    श्रुत स्तुति ( सरस्वती वंदना ) वीतरागी सर्वज्ञ और हितोपदेशी जो तीर्थंकर हैं,अष्ट कर्मों और अठारह दोषों से रहित जिनेश्वर हैं,अनंत चतुष्टय के धारी हैं अनंत कैवल्य ज्ञानी हैं,ऐसे त्रिकालदर्शी जिनमुख से झरती वाणी श्रेयस्कर है!! सरस्वती कहो या श्रुतमाता एक दूजे के पर्याय कहाएं,जैन धर्म में देव शास्त्र गुरु भव्य जनों को मोक्षमार्ग दिखाएं…

  • अवनीश कुमार गुप्ता ‘निर्द्वंद’ की कविताएं | Avnish Kumar Gupta Poetry

    बरखा की गोद में सोती संध्या घन गगन में गूँज रही बादल की मंद पुकार,धरती के आँगन में झर-झर मोती की बौछार। सूरज की लाली थककर पथ से धीरे खो जाए,बूँदों की चादर में संध्या चुपके सो जाए। पीपल की डाली से टपके मोती-से आँसू,भीगती हवाओं में छुप जाए दिन का मानसू। दीपक की लौ…