कविताएँ

  • संजीव सलिल की कविताएं | Sanjeev Salil Poetry

    सेमल अनुभूति की मिट्टी मेंविचारों के बीजसंवेदना का पानी पीकरफूले न समाए।फट गया कठोरता काकृत्रिम आवरण,सृजन के अंकुरपैर जमाकर मुस्काए।संकल्प की जड़ेंजमीं में जमीँ,प्रयास के पल्लव हरियाए।गगन चूमने को आतुरतना तना औरशाखाओं ने हाथ फैलाए।सूर्य की तपिश झेलीपवन संग करी अठखेलीचाँदनी संग आँख मिचौलीचाँद संग खिलखिलाए।कभी सब्जी बन मिटाई क्षुधाकभी चर्म रोग मिटाएघटाकर बढ़ती उम्र…

  • गिरे आंखों से आंसु तो क्या

    गिरे आंखों से आंसु तो क्या गिरे आंखों से आंसु तो क्या ,नहीं मिले गले उनके तो क्या ,तराने लिखने मिले थे दो डगर,नहीं लिख सके मिलन गीत तो क्या ,गिरे आंख से आंसू तो क्या …..सभी कदम तरंग की धुन में ,कोई सुने कुछ कोई कुछ मन में ,मिलाते रहे बिंदुओं को रेख में,जिन्हें…

  • चुनाव

    चुनाव सही व्यक्ति को – – – – – – ज्यों ज्यों चुनाव आ रहे हैं।नेताजी लाड़ जता रहे हैं। जातिवाद की दुहाई दे रहे ।खुद चरित्र की सफाई दे रहे । वाणी में मधु घुल गया है।ओठों पै गुलाब खिल गया है। दुखती रगें पहचानते हैं।कैसे संतुष्ट करें जानते हैं ? मर्यादाऐं तोड़ रहे…

  • कथा रिटायरमेंट की

    कथा रिटायरमेंट की ( हास्य ) .लाली जी कर घोषणा, हुई रिटायर आज।सब सुन लो खुद ही करो, अपना अपना काज।।मैं न करूँ अब काम कुछ, मलो हाथ अरु पैर।मेरे काम सभी करो, तभी मनेगी खैर।।लालू चौके में गए, पुलक पकाई खीर।छौंका राई-हींग से, लाली भईं अधीर।।लल्ला ने सोचा करें, मम्मा को इम्प्रैस।सिंथेटिक साड़ी बिछा,…

  • शादी डॉट कॉम

    “शादी डॉट कॉम “ आजकल कुछ लड़कियों की अजीब सी मानसिकता हो गई है,मिस्टर परफेक्ट ढूंढने के चक्कर में कुंवारी बैठी रहती है। कुछ तो 22 से 28 साल की उम्र में शादी करती है,कोई और 5 साल जीवन साथी तलाशने में लगाती है। मुश्किल से 12 से 15 साल साथ निभाती है,38 से 44…

  • श्री राकेश परमार जी के जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाए

    जन्मदिन मुबारक हो राकेश परमार जी कोबधाई एवं शुभकामनाएंजन्मदिन मुबारक हो जन्मदिन मुबारक होजन्मदिन मुबारक हो ।राकेश परमार जी काजन्मदिन मुबारक हो । हमारे पटेलिया समाज केराकेश परमार जी डिप्टी कलेक्टर हैं ।सादगी और कुशलता केप्रतिभा के वो धनी हैं । आदिवासी जगत में भीअपनी पहचान बनाई है ।हर मंचों में अपनी हीजगह भी बनाई…

  • प्रेमसिंह सोलंकी जी

    प्रेमसिंह सोलंकी जी ( स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व पूर्व विधायक ) हमारे आदर्श आदरणीय श्री प्रेमसिंह सोलंकी जी,जनता के बीच में जन _जन के नायक थे।समाज सेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी,राजनीति के धुरंधर विधायक थे।। तारीख 15 जुलाई सन 1913 को स्थानपटेल फलिया, समोई, मध्यप्रदेश मेंपिता श्री बापुजी सोलंकी.जीबालक बन कर जन्म लिए घर परिवार…

  • खोज

    खोज सुख की खोज में आदमी देखो, कैसे दुख के पीछे दौड़ रहा है!घर है मगर वातानुकूलित नहीं है वह उसकी तृष्णा में चकरा रहाहै, मोटर है लेकिन सामान्य वह,‘लिमोजिन’ चढ़ने के लिए छटपटा रहा है सुख की खोज में लगने के बाद आदमी, आदमी कहाँ रह जाता है? देखते-देखते ही नदी की कलकल और,…

  • रवीन्द्र कुमार रौशन “रवीन्द्रोम “ की कविताएं | Ravindra Kumar Poetry

    मैं बिहार हूं दुनिया का पहला गणराज्यमुझे ही माना जाता है ,एशिया का पहला श्रेष्ठ शिक्षा केंद्रनालंदा ही कहलाता है । धर्म , साधना के लिएदुनिया को बुद्ध , जैन दिए ,भौतिक ज्ञान से निकालकरअध्यात्म का सबको नैन दिए । राजनीति सिखाने वालेचाणक्य ज्ञानवान दिए ,राम कथा लिखने वालेबाल्मीकि महान दिए । जोड़ , घटाव…

  • नयी रोशनी

    नयी रोशनी अंधेरों की बाहों से छूटकर आई है,एक उम्मीद की किरन जो जगमगाई है।थमी थी जो राहें, अब चल पड़ी हैं,दिलों में नयी रोशनी जो घर बसाई है। खामोशियों की परतें अब पिघलने लगीं,अधूरी सी कहानियां अब संवरने लगीं।हर कोना जो सूना था, वो चमक गया,नयी सुबह की आहट दिल को छूने लगी। दिकु,…