कविताएँ

  • कर्म

    कर्म राहें चाहे जितनी कठिन हों,मैं चलना जानता हूँ,तेरे साथ की उम्मीद में,मैं हर मंजिल पाना जानता हूँ। कर्म ही मेरा साथी है,पर तेरी याद भी संजीवनी है,हर कदम पर तुझे पाने की आशा,मेरे सम्पूर्ण जीवन की कथनी है। मेरे सपनों में बस तू है,पर मेहनत से है मिलन का रास्ता,क्योंकि कर्म के बिना अधूरा…

  • वर्तमान समय में बढ़ता फैशन

    वर्तमान समय में बढ़ता फैशन फैशन की दुनिया में हम खो गए,अपने आप को भूलकर हम दूसरों को देख गए।कपड़े, जूते, एक्सेसरीज़ की दौड़ में हम भाग गए,और अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण की अनदेखी कर गए। हमारे घरों में नए और आधुनिक सामान आए,लेकिन हमारे दिलों में पुराने और सच्चे मूल्यों की कमी आई।हमारे जीवन…

  • तुझ तक पहुंचने की चाह

    तुझ तक पहुंचने की चाह कोई मिल जाए जो तुझ तक पहुंचा दे,मेरे शब्द, मेरी सासें तुझ तक बहा दे।कि तू जान ले, आज भी प्रेम वहीं खड़ा है,तेरी राहों में, तेरी बाहों में, खुद को समेटे खड़ा है। चाहत की लौ बुझी नहीं है अब तक,तेरी यादों में जलती रही है अब तक।तेरे बिना…

  • रुपेश कुमार यादव ” रूप ” की कविताएं | Rupesh Kumar Yadav Poetry

    कलम अंधेरा दिलों का मिटाती कलम हैछुपे भाव दिल की दिखाती कलम हैखुशी और गम की हो कोई कहानीभावों से पन्ना सजाती कलम है।। भरी है कलम में दुनिया की ताकतसोता है कोई, कलम से कोई जगतडरता है कोई ,कलम से कोई भागतसबसे है प्यारी कलम हमें लागत।। गलत और सही का यह अंतर बतातीपढ़ना…

  • जीवन साथी

    जीवन साथी “जीवन साथीजीवन का साथी हैसम्मान करो।” “नजरंदाजकभी नहीं करनासाथ ही देना।” “भरोसा करोएक दूसरे परसंदेह नहीं।” “घमंड छोड़ोमधुरता से बोलोसफल होगे।” “क्रोधित नहींतुम्हें कभी होना हैशांत ही रहो।” “व्यस्त रहनाइधर-उधर कीबात न करो।” “पति पत्नी तोदो पहिए होते हैंचलती गाड़ी।” “एक नहीं होफिसलती है गाड़ीगिरती झाडी।” “खुश किस्मतसभी नहीं होते हैंनसीब वाले।” “बद…

  • वर्तमान नारी की झलक

    वर्तमान नारी की झलक सदियों से रुढ़ियों के पर्दो में ढ़क कर जिसे रखा,आज वो समाज के इस पर्दे को हटाने आयी है, डरी,सहमी ,नासमझ स्त्रियों के दिल का बोझवो आशा बनकर मिटाने आयी है, अपनी ताकत से गांव ,शहर ही नहीं देश में भी जागरूकता लायी है, आज नारियों के कार्यों के चर्चा से…

  • ऋतु गर्ग की कविताएं | Ritu Garg Poetry

    पढ़ी-लिखी बेटी मजबूत पीढ़ी बस यहां पर आकरमैं कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता हैबिटिया की शादी करोगी क्याअरे भाई !यह कोई पूछने की बात हैबेटियों को भी तो अपना घर बसाना है,उनको भी तो अपने घर जाना है। बस मैं यहां पर आकर,कमजोर हो जाती हूं! जब कोई पूछता है,बेटी को खाना बनाना…

  • उन्माद भरा बसन्त

    उन्माद भरा बसन्त फ़रवरी की धूप में, सीढ़ियों पर बैठ कर, शरद और ग्रीष्म ऋतु के,मध्य पुल बनाती धूप के नामलिख रही हूँ ‘पाती’आँगन के फूलों परमंडराती तितलियाँ ,पराग ढूँढती मधुमक्खियाँ,गुंजायमान करते भँवरेमन को कर रहे हैं पुलकित हे प्रकृति!यूँ ही रखनायह मन का आँगन आनंदितसुरभित, सुगन्धितमधुमासी हवा का झोंकागा रहा है बाँसुरी की तरहहृदय…

  • कमल कुमार सैनी की कविताएं | Kamal Kumar Saini Poetry

    सब एक जैसे ही है सब एक जैसे ही हैहांसब एक जैसे ही हैसब कहते हीं सही हैहोता भी यही हैमनोविज्ञान कहता हैलगभग भावनाओं का जालसभी मेंसमान रहता हैमेरे वाला/मेरे वालींअलग हैं यह वहम हैसब उसी हाड़ मांस किबनावट हैये जो बाहरी रंग हैये सिर्फ सजावट हैकुछ में चमक हैकुछ में फिकापन है सब्र अब…

  • सरहदें

    सरहदें कौन कहता है,सरहदों का कोई रंग नहीं होता,वो बताएँगे सरहद का रंग,जिसने इन लकीरों को बनते देखा,बहते गर्म लहू से,बनती खिंचती रेखा सरहद का रंग लाल होता हैगाढ़ा तरल लालजो बहता रहता हैगलेशियर से निकलीनदी की तरहजो कभी सूखती नहीं धर्म और भाषा का भेदबड़ा होता है, बहुत बड़ाजिसे नहीं मिटा पायागाँधी जैसा महामानव…