कविताएँ

  • ज्ञान का दीप

    ज्ञान का दीप जिनका किरदार सदाकत है lजिनकी तदरीस से पत्थर पिघलत है llअकेले चलने का आभास न कराया lहमेशा साथ देकर सफल कराया ll ” मित्र ” कहूँ तो ” मन ” शांत है l” भाई ” कहूँ तो ” आत्मा ” तृप्त है ll” गुरु ” कहूँ तो ” पद ” शेष है…

  • राजपाल सिंह गुलिया की कविताएं | Rajpal Singh Golia Poetry

    उसके मुँह से बात निकली उसके मुँह से बात निकली,बात क्या औकात निकली. थक गया भिखारी दुआ दे,तब कहीं खैरात निकली. घूस समझा था जिसे वह,सा’ब की सौगात निकली. करवटें बदली हजारों,तब कहीं वो रात निकली, नेक समझा था सभी ने,नार वह बदजात निकली. नाव थी महफूज़ वह जो,धार के अनुवात निकली. उसको देखा तो…

  • ढाट कवि कागा

    हुक्मरान जवान रोज़गार की तलाश में भटक रहे है,इंसान अरमान की आश में भटक रहे हैं। जीवन में जीना घुट कर इज़्ज़त आबरू नहीं,किसान क़िस्मत की तलाश में लटक रहे हैं। ग़रीब अपनी गै़रत की हिफ़ाज़त ख़ात़िर करते कोशिश,रोज़ी की तलाश में मायूस मटक रहे हैं। महंगाई की मार से परेशान मज़दूर धंधा नदार्द,पगार की…

  • श्री जगन्नाथ रथ यात्रा

    श्री जगन्नाथ रथ यात्रा उड़ीसा राज्य की पावन धरा,जगन्नाथपुरी धाम।पुराणों में बैकुंठ धरा का,शत – शत करें प्रणाम।। विग्रह रुप में तीनों विराजे,है जगन्नाथपुरी नाम।कृष्ण,बहन सुभद्रा और साथ में भाई बलराम।। विश्व कर्मा जी ने प्रतिमाओं का,किया है निर्माण।दर्शन – मात्र से भक्तों का,यहाॅं होता है कल्याण।। रथ – यात्रा का नगर भ्रमण,गूॅंजता है जयकारा।जगन्नाथ…

  • योग

    योग ( दोहा आधार छंदगीत ) श्वास और प्रश्वास से, समता भाव निखार।।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। समय निकालो योग का, करिए प्राणायाम।स्वस्थ्य शरीर रहे सदा, चित्त वृत्ति परिणाम।।ध्यान धारणा यम-नियम, आसन प्रत्याहार।योग मिलन है मुक्ति है, योग ही शाश्वत सार। चित्तवृत्ति को साधकर, स्थिर करता योग।आसन विविध प्रकार के, रखते…

  • बिमल तिवारी की कविताएं | Bimal Tiwari Poetry

    फिर मिलेंगे झंझटें तमाम आ के चली गईहोना था बदनाम हो के चली गईजीवन में वसंत इतने देख लिए,कीकई सुहानी शाम आ के चली गई, हर सुबह एक ख्वाब में ही बीत गईकुछ करने की ख्याल में ही बीत गईक्या खोया क्या पाया अब तक मैंनेसमय इसी सवाल में ही बीत गई, जीवन आ के…

  • बादल कही से आओ ना

    बादल कही से आओ ना ( बाल गीत ) सूरज मामा आसमान परबढ़ती गर्मी तापमान परसुख गईं सब नदियां नालेदादी नहीं लेती एक निवाले यह गर्मी खूब सताती हैतन मन में आग लगाती हैपंखे के नीचे सोते हैंफिर भी गर्मी से रोते हैं गुनगुन कान्हा सोना प्यारेगिनते रहते जाग के तारेनारियल पानी खीरा ककड़ीकुछ नहीं…

  • इतने शून्य उफ इतने शून्य

    इतने शून्य उफ इतने शून्य इतने शून्य उफ इतने शून्यये शून्य जीवनये जीवन का शून्यये आसमान शून्यये आसमानों में शून्यये रिश्ते शून्यये लहू में बहता शून्यइतने शून्य.. उफ इतने शून्यशून्य ही शून्यदुनिया का नही पता मगर मैं तो रह गया दंग.इतने शून्य उफ इतने शून्य.लड़ने को कहते सब मगर शून्य से कैसे करे कोई जंगदुनिया…

  • छाया है पिता

    छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…

  • मेरी कहानी में तुम

    मेरी कहानी में तुम पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी। कभी कोई बात,कभी कोई लम्हा,तो कभी वो खामोशियाँ,जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं। मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,अधूरे ख्वाब थे,अधूरी बातें थीं,और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं…