Rajpal Singh Golia Poetry

राजपाल सिंह गुलिया की कविताएं | Rajpal Singh Golia Poetry

उसके मुँह से बात निकली

उसके मुँह से बात निकली,
बात क्या औकात निकली.

थक गया भिखारी दुआ दे,
तब कहीं खैरात निकली.

घूस समझा था जिसे वह,
सा’ब की सौगात निकली.

करवटें बदली हजारों,
तब कहीं वो रात निकली,

नेक समझा था सभी ने,
नार वह बदजात निकली.

नाव थी महफूज़ वह जो,
धार के अनुवात निकली.

उसको देखा तो लगा ये,
यादों की बारात निकली.

Rajpal Singh Gulia

राजपाल सिंह गुलिया
जाहिदपुर, झज्जर ( हरियाणा )

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