बादल कही से आओ ना
बादल कही से आओ ना
( बाल गीत )
सूरज मामा आसमान पर
बढ़ती गर्मी तापमान पर
सुख गईं सब नदियां नाले
दादी नहीं लेती एक निवाले
यह गर्मी खूब सताती है
तन मन में आग लगाती है
पंखे के नीचे सोते हैं
फिर भी गर्मी से रोते हैं
गुनगुन कान्हा सोना प्यारे
गिनते रहते जाग के तारे
नारियल पानी खीरा ककड़ी
कुछ नहीं खाती गैया बकरी
धूप सुबह ही दर पर आते
बाहर हम तो जा नहीं पाते
पीपल पेड़ की छांव में
हम खेलते कागजी नाव में
बादल कही से आओ ना
पानी छत पर बरसाओ ना
फुदक फुदक के गाती चिड़िया
संग जमी पे आती चिड़िया

©बिमल तिवारी आत्मबोध
देवरिया उत्तर प्रदेश
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