छलावा
छलावा उस धरा सेइस धरा तकउस गगन सेइस गगन तकउस जहां सेइस जहां तकउस परिवेश सेइस परिवेश तकउस गांव सेइस शहर तकका सफर…रहा नहीं आसानजिसने बदल दिएसारे अरमान…अपनों के साथजीने का सपनाबन कर…रह जाएगा सपनाजो हो नहीं सकताअब कभी अपनाअब अपनों को…नहीं दे पाते वो सम्मानजो थे कभी जीवन की जान श्याम सुंदर यह भी…










