नदी का किनारा

नदी का किनारा

नदी का किनारा

बहती नदी संग मैं ठहरा सा बैठा,
तेरी राहों में उम्मीदों को समेटा।
लहरें भी अब तो कहने लगीं,
दिकु, लौट आओ,
इन्हीं दुआओं के धागों से हूँ मैं लिपटा।

धूप-छाँव का ये खेल भी सुना सा है,
तेरी हँसी के बिना हर रंग धुंधला सा है।
पानी में देखूँ तो चेहरा तेरा उभरे,
तेरी आहटों का हर साया अपना सा है।

हर लहर तेरे नाम की धुन गाती है,
तेरी परछाईं भी अब मुझे भरमाती है।
अब इन बहारों में क्या धड़कनें सुनें,
जब तक न तू आए, उदासी ही सताती है।

नदी के किनारे नाम तेरा लिखा,
लहरों की छुअन से यह और भी गहरा दिखा है।
अब लौट भी आओ कि साँसें अधूरी हैं,
तेरे बिना हर लम्हा, प्रेम बेसहारा जिया है।

कवि : प्रेम ठक्कर “दिकुप्रेमी”
सुरत, गुजरात

यह भी पढ़ें :

Similar Posts

  • गणतंत्र दिवस मनाएं हम | Gantantra Diwas Poem

    गणतंत्र दिवस मनाएं हम ( Gantantra diwas manaye hum )   हर साल आता है जनवरी-माह में यह पर्व, प्यारा और न्यारा जिस पर करते सब गर्व। इस दिन अपनाया गया ये भारत संविधान, जो लोकतंत्र की पहचान एवं हमारी शान।। झण्डा फहराकर मनातें गणतंत्र दिवस हम, आयोजन करते नाच गान खुशियों से हम। २६…

  • दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार

    दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार दीपावली है दीपोत्सव का सबसे प्यारा त्यौहार,दीपक जलाकर इसे मनाता हैं देखो सारा संसार।जगमगाता है जग, दीपक की ज्योति की लौ से,दीप जलाते,खुशी मनाते हैं, है रंगोली की भरमार।। दीपावली सनातनियों का है सबसे प्यारा त्यौहार,जग के अंधकार मिटाता है होती रोशनी की भरमार ।बुराई से अच्छाई की विजय कर घर…

  • अटल नियम | Atal Niyam

    अटल नियम ( Atal Niyam )    कौन देगा सम्मान आपको दिए नहीं जब आप किसी को समय रहा मूल्यवान आपको किया नहीं कदर और के वक्त को निभाया नहीं दिया वचन आपने रहे दिखाते उसे केवल सपने स्वप्न आपका भी पूरा होगा कैसे टूटते हैं सपने जब आपसे और के बदल देंगे क्या विधि…

  • आपस में करेंगे सहकार

    आपस में करेंगे सहकार ***** आपस में करेंगे सहकार, यूं न बैठेंगे थक-हार। कमियों पर करेंगे विमर्श, खोजेंगे सर्वोत्तम निष्कर्ष। मिलजुल सब करेंगे संघर्ष, चेहरे पर होगा हर्ष ही हर्ष। देखते हैं परिस्थितियां कब तक नहीं बदलतीं? कब तक खुशियों की फुलझरिया नहीं खिलती? आंखों से आंखें,गले से गले नहीं मिलती? यकीं है शीघ्र ही…

  • पावन प्यार साथिया | Pawan Pyar Sathiya

    पावन प्यार साथिया ( Pawan pyar sathiya )    अधरों से ही बहती है मधुर रसधार साथिया। लबों से ही झलकता है पावन प्यार साथिया। मुस्कुराता चेहरा तेरा लगता है खास साथिया। तेरे गमों का हो जाता हमको एहसास साथिया। जुड़े हैं दिलों के तार दिल से हर बार साथिया। तुमसे ही मिलकर बने सुंदर…

  • मां के आंगन की मिट्टी | Dr. Preeti Parmar Poetry

    मां के आंगन की मिट्टी ( Maan ke aangan ki mitti )    दो पल के लिए मेरे मन उस रास्ते से गुजर जाऊं मां के आंगन की मिट्टी अपने आंचल में भर लाउ मां के आंचल की खुशबू अपनी सांसों में भर लाऊं आम के पेड़ और झूला धमाचौकड़ी का मंजर अपनी आंखों में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *