वर्तमान नारी की झलक

वर्तमान नारी की झलक

वर्तमान नारी की झलक सदियों से रुढ़ियों के पर्दो में ढ़क कर जिसे रखा,आज वो समाज के इस पर्दे को हटाने आयी है, डरी,सहमी ,नासमझ स्त्रियों के दिल का बोझवो आशा बनकर मिटाने आयी है, अपनी ताकत से गांव ,शहर ही नहीं देश में भी जागरूकता लायी है, आज नारियों के कार्यों के चर्चा से…

ritu garg

ऋतु गर्ग की कविताएं | Ritu Garg Poetry

परंपराओं की छांव शुक्र है, पिछला जमाना साथ चल रहा है,कुछ अरमान, कुछ तहज़ीब संग पल रहा है। कुछ बातें अधूरी रह जाती हैं,कुछ सपने मुकम्मल नहीं हो पाते हैं। जो साथ न होता उस बीते कल का,हम अपनी राहें कहाँ से पाते? हां, वही पुराना जमाना हमें राह दिखाता है,परंपराओं की सीख सहेज कर…

उन्माद भरा बसन्त

उन्माद भरा बसन्त

उन्माद भरा बसन्त फ़रवरी की धूप में, सीढ़ियों पर बैठ कर, शरद और ग्रीष्म ऋतु के,मध्य पुल बनाती धूप के नामलिख रही हूँ ‘पाती’आँगन के फूलों परमंडराती तितलियाँ ,पराग ढूँढती मधुमक्खियाँ,गुंजायमान करते भँवरेमन को कर रहे हैं पुलकित हे प्रकृति!यूँ ही रखनायह मन का आँगन आनंदितसुरभित, सुगन्धितमधुमासी हवा का झोंकागा रहा है बाँसुरी की तरहहृदय…

Kamal Kumar Saini Poetry

कमल कुमार सैनी की कविताएं | Kamal Kumar Saini Poetry

सब एक जैसे ही है सब एक जैसे ही हैहांसब एक जैसे ही हैसब कहते हीं सही हैहोता भी यही हैमनोविज्ञान कहता हैलगभग भावनाओं का जालसभी मेंसमान रहता हैमेरे वाला/मेरे वालींअलग हैं यह वहम हैसब उसी हाड़ मांस किबनावट हैये जो बाहरी रंग हैये सिर्फ सजावट हैकुछ में चमक हैकुछ में फिकापन है सब्र अब…

सरहदें

सरहदें

सरहदें कौन कहता है,सरहदों का कोई रंग नहीं होता,वो बताएँगे सरहद का रंग,जिसने इन लकीरों को बनते देखा,बहते गर्म लहू से,बनती खिंचती रेखा सरहद का रंग लाल होता हैगाढ़ा तरल लालजो बहता रहता हैगलेशियर से निकलीनदी की तरहजो कभी सूखती नहीं धर्म और भाषा का भेदबड़ा होता है, बहुत बड़ाजिसे नहीं मिटा पायागाँधी जैसा महामानव…

अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता

क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता

‘क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता’ अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता,किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।ज़िंदगी की राहों में चलते हैं हम,कभी खुशी तो कभी गम का सामना करते हैं हम। कभी राहों में फूल मिलते हैं,कभी काँटों से घायल होते हैं हम।फिर भी चलते रहते हैं अपनी मंज़िल की ओर,क्योंकि अधूरे…

संवेदना व यथार्थ

संवेदना व यथार्थ : ‘अंतर्मन की यात्रा’

संवेदना व यथार्थ हाँ, ‘दया’ मेरे कवि-हृदय का,एक महान तथा विशेष गुण है |सरलता,धैर्य तथा करुणा का धनी हूँ |‘दया’ मेरा सबसे बड़ा धर्म है |निर्मल मन को,असाधारण रूप से,शांत, स्थिर होना चाहिए |अनमोल जीवन को समझने के लिए |कवि की आवश्यकता से अधिकसम्वेदनशीलता नुकसानदायक है |मानवता, प्रेम, एकता, दया, करुणा,परोपकार, सहानुभूति, सदभावना,तथा उदारता का…

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी की कविताएं | Sushil Chandra Bajpai Poetry

धन्यवाद प्रभु! धन्यवाद प्रभु! आभारी हूं,जो आये निज गेह।मेरा नहीं, तुम्हारा ही सब,बरसाया जो स्नेह। तमस हो गया नष्ट सभी,मन में छाया उजियारा।मन में अब विश्वास जगा है,होऊंगा भव पारा। अपना जो कर तुम्हें समर्पित,होता चिन्ता मुक्त।दर्शन मिला, आज लगता है,पूर्ण हुआ जो भुक्त। इच्छा मुक्त हो गया लगता,अब आई है बारी।चरण-कमल-सेवा में रख लो,अब…

श्रीमती बसन्ती “दीपशिखा” की कविताएं | Srimati Basanti Deepshikha Poetry

श्रीमती बसन्ती “दीपशिखा” की कविताएं | Srimati Basanti Deepshikha Poetry

“बचपन की वो मीठी यादें” बचपन की वो खट्टी-मीठी बातें,जैसे कोई मीठा स्वप्न सुहाने।वो कागज़ की कश्ती, बारिश के मोती,भीग-भीग कर हँसना बेफिक्र, अनजाने। गुड़ियों की शादी, खेल अनगिनत,छोटी-छोटी खुशियों का था जोश अलग।दीवारों पे खींची थीं रंगीन लकीरें,सपनों की दुनियाँ थी सच से अलग। माँ की गोदी, दादी की कहानियाँ,पिता के कंधों की ऊँची…

टेडी डे

टेडी डे – दिकु के नाम

टेडी डे – दिकु के नाम तेरी बाहों सा एहसास लिए,टेडी को दिल से लगा रखा है।तेरी यादों की ख़ुशबू संग,हर लम्हा इसमें बसा रखा है। रुई सा कोमल, प्यार सा प्यारा,तेरे जैसी मासूमियत समेटे,रहती है इसमें मेरे मन की बातें,तेरी यादें धागों की तरह मुझको है लपेटे। दिकु, तू जो होती यहां,टेडी की जगह…