कविताएँ

  • हनुमान जयन्ती

    हनुमान जयन्ती शांति,गीत,श्रद्धा,समर्पणआदि गरिमामय जीवनऔर व्यक्तित्व सेधर्म का सुंदर समन्वयज्ञान सागर लहराने वालेआनंद के लोक में ले जाने वालेक़लम के कृति रत्न समुद्दभूतहनुमान जी को मेरा भावोंसे वंदन -अभिनंदन !शत- शत नमन ! प्रणाम !जो ज्ञाता है वहस्वयं अज्ञात है ।अज्ञात को ज्ञात करनेका प्रयत्न होना चाहिएविभिन्न माध्यमों के द्वाराक्योंकि आत्मा को भी अपनासही से…

  • मन

    मन बहुत शक्तिशाली हैव्यापक हैउसका साम्राज्यउसकोचुनौती देने वालाकोई नहीं हैअतः भलाई हैप्रकृति के नियम केसाथ चलने में हीसार नहींविपरीत दिशा में कोईमन में कालुष्य न आयेकर्म काट करइतना हिम बनकरचले कि खुद केसंगति वह जो नीति सिखायेवैराट्य प्रकट होवाणी में वैर-भावन उगने पायेराग- द्वेष से दूरहो जायें औरध्रुवतारा -सी चमकलिए सारे जगत मेंचमक सही सेआत्मा…

  • जय श्री राम ( दोहे )

    जय श्री राम ( दोहे ) जनमे जिस क्षण महल में, कौशल्या ने लाल।गूंजी घर -घर में तभी, ढोल मँजीरा ताल ।। पिता वचन की राम ने , रखी सहज ही लाज |ठुकराया संकोच बिन , अवधपुरी का राज ।। पीछे पीछे चल दिये ,जहाँ चले प्रभुराम।।सीता लक्ष्मण साथ में, छोड़ अवध का धाम ।…

  • 2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस

    2624 वां महावीर जन्म कल्याणक दिवस भगवान महावीर को मेरा भावों से शत – शत वन्दन !भगवान महावीर की राह को अपनायें ।मानव जीवन सफल बनायें ।अब भोर है उठ जाग जायें ।क्यों आँखें मूंदकर हम सोयें ।संत हमारी मूर्छित चेतना जगाते ।कीमती वक्त हमारा हम क्यों खोते।दुनिया की हैं यह झूठी माया ।जैसे बादल…

  • जब जंगल रोए

    जब जंगल रोए – कांचा गचीबोवली की पुकार ( दिकुप्रेमी की कलम से ) कुछ आवाज़ें मौन होती हैं,जैसे टूटी टहनियों की टीस,जैसे मिट्टी से उखड़ते पेड़ों की कराहजिन्हें कोई सुनना नहीं चाहता। तेलंगाना के कांचा गचीबोवली वन क्षेत्र मेंविकास की आड़ मेंविनाश का वाक्य लिखा गया।जहाँ कभी हवाओं की सरसराहटकवियों को गीत देती थी,वहाँ…

  • रामनवमी का त्योहार

    रामनवमी का त्योहार रामनवमीअसहयोगजो व्यक्ति अकेलाप्रभु भक्ति में रतरहकर जीवनजीना जानता हैं ,वह स्वयं मेंआनंद कोखोज लेता हैं ;उसे प्रभु श्री रामकी तरह असंयममें असहयोगकरने में कोईकठिनाई नहींहोती हैं ।क्योंकि उसकेमन में कोईचाह नहीं हैं ,आकांक्षा नहीं हैं ,वह स्वयं आत्मामें संतुष्ट हैं ।जो सन्तुष्टहै वह प्रभु श्रीराम की तरहकर सकता हैअसहयोग । प्रदीप छाजेड़(…

  • कवि और कुत्ता

    कवि और कुत्ता मैं कवि हूॅं,आधुनिक कवि हूॅं।शब्दों का सरदार हूॅं,बेइमानों में ईमानदार हूॅं । नेताओं का बखान करता हूॅं,सरकार का गुणगान करता हूॅं,योजनाओं की प्रशंसा करता हूॅं,फायदे का धंधा करता हूॅं,डर महराज का हैपीले यमराज का है। मैं संयोजक हूॅंसपा, बसपा, भाजपा, कांग्रेस का,मुझे महारत है रंग बदलने का,किसी मौसम, किसी परिवेश का,उधार में…

  • 266वां भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस

    266वां भिक्षु अभिनिष्क्रमण दिवस भिक्षु स्वामी का नाम स्मरण कर जीवन सफल बनायें ।मानव जीवन को धर्म कर सफल बनाये ।हमको आज हो मिला हैं फिर न मिलेगा ।बगिया में सुरभित यह फूल महान हैं ।जो खिला – खिला हैं फिर न खिलेगा ।भिक्षु स्वामी का नाम स्मरण कर जीवन सफल बनायें ।हीरों – सा…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) नवम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) नवम दिवस भुवाल माता सबकी आँखों के तारे ।जन – जन की प्यारी भुवाल माता ।आस्था की आधार भुवाल माता ।सबके ह्रदय में करती वास माता ।सचमुच माता का दर्शन क्रान्त हैं ।चिन्तन माता का निभ्रान्त हैं ।सबके सपनों की आकार माता ।आस्था पर ज्योति उभारती माता।सत्य – शोध में…

  • नवरात्रि पर्व (चैत्र ) अष्टम दिवस

    नवरात्रि पर्व (चैत्र ) अष्टम दिवस सत्य समता के तटों से उन्मुक्त धारा बहे ।भुवाल – माता को नमन हमारा ।हम सबका सम्पूर्ण समर्पण हों ।आन्तर ह्रदय विनय अनुनय हों ।मलयाचल की मधुर हवाएं ।जिधर निहारें दाएं बाएं ।सांस- सांस सुरभित शोभित बन ।जीवन का कण – कण मधुमय हो ।कल्पवृक्ष यह कामदुधामा ।यह नवरात्रि…