ग़ज़ल

  • हमारे कभी | Hamare Kabhi

    हमारे कभी ( Hamare Kabhi ) चाँद उतरा न आँगन हमारे कभीउसका वादा था होगें तुम्हारे कभी झूठ वह बोलकर लूटता ही रहाथा यकीं की बनेंगे सहारे कभी दुख ग़रीबों का मालूम होगा तभीमेरी बस्ती में इक दिन गुज़ारे कभी मुझको अरमान यह एक मुद्दत से हैनाम मेरा वो लेकर पुकारे कभी हमसफ़र बन के…

  • जब से देखी है | Jab se Dekhi Hai

    जब से देखी है ( Jab se Dekhi Hai ) जब से देखी है पढ़कर ख़ुदा की किताब।छोड़ दी हम ने तब से जफ़ा की किताब। राहे ह़क़ से भटक जाओगे दोस्तो।भूल कर भी न पढ़ना अना की किताब। दिल कहीं पर भी लगता नहीं बाख़ुदा।दूर जब से हुई वो वफ़ा की किताब। औने-पौने भी…

  • मेरे भीतर | Rajni ki Ghazal

    मेरे भीतर ( Mere Bheetar ) चढ़ा अपने सनम के इश्क़ का पारा मेरे भीतरग़ज़ल कहने का मौज़ूं है बड़ा प्यारा मेरे भीतर रवानी बन गई है प्रेम की धारा मेरे भीतरहै ए’लान-ए-बहाराँ-सा ये इकतारा मेरे भीतर कहूँ कैसे मैं तुमसे दिल है बेचारा मेरे भीतरन जाने कबसे है पागल ये बंजारा मेरे भीतर तुम्हारे…

  • निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं

    निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।तुम्हें अपने जलवे दिखा दूं चलो मैं। न जाओ मुझे छोड़ कर मयकदा तुम।के बदनाम हो जाओगे बाख़ुदा तुम।क़रीब आओ मेरे न यूं दूर जाओ।मुह़ब्बत की दौलत लुटा दूं चलो मैं।निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं। कहीं प्यार ऐसा न पाओगे…

  • दीदार करें कैसे | Deedar Karen Kaise

    दीदार करें कैसे ( Deedar karen kaise ) दीदार करें कैसे, दिलदार बता देनाचाहत की जो रस्में हैं, हमको भी सिखा देना कानून से बढ़कर तो, होता ही नहीं कोईगर की है ख़ता मैंने, मुझको भी सज़ा देना हालात बहुत बिगडे़, जीना भी हुआ मुश्किलहैं संग बने इंसा, जीने की दुआ देना जागीर मुहब्बत की,…

  • गिले-शिकवे की रीत

    गिले-शिकवे की रीत पहर-दर-पहर वो मुझे शिद्दत से याद आते रहे, वो क्या जाने ये चांँद-सितारे किस कदर उनकी यादों के नश्तर मेरे सीने में चुभाते रहे, बहुत चाहा था कि भूल जाएं उस बेवफ़ा को, मगर ख़्याल उनके दिल से निकलते ही नहीं, बनाकर आशियाना इस कदर वो दिल में हलचल मचाते रहे, शब-ए-हिज्रा…

  • रत-जगे | Rat-Jage

    रत-जगे ( Rat-Jage ) ख़ल्वत में रत-जगे,कभी जलवत में रत-जगे।बरसों किए हैं हमने मुह़ब्बत में रत-जगे। करते हैं जो ख़ुदा की इ़बादत में रत-जगे।आएंगे काम उनके क़यामत में रत-जगे। समझेगा कैसे हाय वो लुत्फ़-ए-ग़म-ए-ह़यात।जिसने किए हैं सिर्फ़ मुसर्रत में रत-जगे। क़ुरबत में चैन देते हैं यह बात सच है,पर।तकलीफ़ दिल को देते हैं फ़ुरक़त में…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • रूह़-ए-नज़र | Rooh-e-Nazar

    रूह़-ए-नज़र ( Rooh-e-Nazar ) नक़्शा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है।जलवा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। छुपते थे जिसको साय में शर्मा के वो सदा।परदा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। हंसते हुए दिया था जो उसने गुलाबे इ़श्क़।तोह़फ़ा वो आज तक मेरी रूह़-ए-नज़र में है। लिक्खा था ख़ूने दिल से…

  • कोई बात नहीं | Koi Baat Nahi

    कोई बात नहीं ( Koi Baat Nahi ) दिल दुखाने की कोई बात नहींदुख न जिसमें हों वो हयात नहीं उनका जाना तो कोई बात नहींऐसा लगता है कायनात नहीं दिल इसी बात से परेशाँ हैएक उसकी ही इल्तिफ़ात नहीं उसने दीवाना कर दिया इतनायाद अब कोई हादसात नहीं चाँद तारे भी तुझको दे देताक्या…