ग़ज़ल

  • दुख ही दुख | Dukh Shayari Hindi

    दुख ही दुख ( Dukh hi dukh )   बोझ यहीं रहता है मन में दुख ही दुख झेले बचपन में याद बहुत आया आज मुझे खेला हूँ जिस घर आंगन में फ़ूल भरे दामन में कैसे वीरां है गुलशन गुलशन में और नहीं कोई भाता है तू रहती दिल की धड़कन में याद किसी…

  • मेरा वतन | Mera Watan

    मेरा वतन ( Mera watan )    गुलाबी सा बहुत मेरा वतन आज़म रहे इसकी सदा यूं ही फ़बन आज़म ख़ुदा से रोज़ करता हूँ दुआ मैं ये न हो दिल में किसी के भी दुखन आज़म अदावत के नहीं काँटें उगे दिल में मुहब्बत का रहे हर पल चलन आज़म फ़िदा मैं क्यों न…

  • अज़ब धोखा हुआ | Dhoka Shayari Hindi

    अज़ब धोखा हुआ ( Ajab dhoka hua )    कल, बुलंदी की तलब में रूह का सौदा हुआ ज़िन्दगी भारी हुई देखो अज़ब धोखा हुआ ॥   राह-ए-उल्फ़त में चले नीयत सदाक़त अर्श पर फिर तभी रुसवाइयों का भी उन्हें ख़द्शा हुआ  ॥   बढ़ रहे बेगार, मुफ्लिश सर- जमीं मक्तल हुई हिल गया रब,…

  • राधा कान्हा के द्वार | Radha Kanha ke Dwaar

    राधा कान्हा के द्वार ( Radha kanha ke dwaar )    फिर से  खड़ी  हुई  है  राधा  आ कान्हा के द्वार । माँग  रही है  उससे  अपने , सारे  ही  अधिकार ।। वापस करे कन्हैय्या गोकुल से चोरी की खुशियाँ और चुकाए  वृन्दावन का, पिछला  सभी उधार ।। महका रचा बसा खुशबू सा फिर भी…

  • अगर साकी | Agar Saqi

    अगर साकी ( Agar Saqi )    बता देते तो अच्छा था कहाँ तेरी नज़र साकी तो फिर हम झट से कर देते पियाला भी उधर साकी ॥ दिया ना जाम वो जिसकी तमन्ना थी मिरे दिल में गिला क्या अब तिरे मय का नहीं होगा असर साकी ॥ छलक जाता जो पैमाना , क़यामत…

  • बेमानी | Bemani

    बेमानी ( Bemani )   हक़ीक़त दिलों की यहाँ किसने जानी है, गहराई जितनी उतनी उलझी कहानी है। अक्सर सूरत में छिप जाते है किरदार वरन हर मुस्कुराते चेहरे की आँख में पानी है। अपने ही किस्से में मशगूल रहे इस कदर एहसासों की अनकही बातें किसने जानी है। हरी हो टहनी तो सह लेती…

  • प्यार में | Pyar Mein

    प्यार में ( Pyar Mein )    प्यार में वो हुआ जुदा आज़म कर गया खूब दिल ख़फ़ा आज़म ग़ैर आँखें वो कर गया है आज वो रहा अब न आशना आज़म ज़हर मुझको मिला जफ़ा का ही प्यार की कब मिली दवा आज़म जुल्म सहता रहा मुहब्बत के कब वफ़ा में मिली वफ़ा आज़म…

  • क्यों | Kyon

    क्यों ? ( Kyon )    हाथ मिला उल्फत दिखलाते दिल मिलने से क्यों घबराते? हुस्न परस्ती के दीवाने वस्फ की राह नही वे जाते। दैर -ओ -हरम के ये बासिंदे नफ़रत की दीवार बनाते । बातिल साज़ी बहुत हुई अब कुछ तो वादे कभी निभाते । हरदम क्यूँ तकलीद करूं मैं | क्यूंँ मेरी…

  • थोड़े ही है | Thode hi Hai

    थोड़े ही है ( Thode hi hai )   जुल्मो – फ़रेब से हाशिल कामयाबी थोड़े ही है। है मज़हब अलग तो ये खराबी थोड़े ही है।   जिन्होंने इंसानियत का पाठ पढ़ाया दुनियाँ को, उनका ज्ञान महज़ किताबी थोड़े ही है।   जो जल रहा है नफ़रत की आग में रातो -दिन ‘सौमित्र ‘,…

  • बेहिस सफर | Behis Safar

    बेहिस सफर ( Behis safar )    सफर में बीच ही कहीं ठहर के देखे चलो खुद के करीब कितने कहीं रुक के देखे चलो अदब के साये में कटी है जिन्दगी उनकी बदी के साये में हम भी खिलखिलायें चलो जो दिखे थे अपने वो अजनबी हैं सभी वो जो दम भरते हैं उन्हें…