हे राजन | Ghazal Hey Rajan

हे राजन

( Hey Rajan )

हे, राजन तेरे राज में,रोजगार नही है,
मुफ़लिसों को वाजिब, पगार नही है।
====================

है खास जिनके धन के अंबार लगे है,
देखो गरीब तुम्हारे, गुनाहगार नही है।
====================

ये कोई दुश्मन नही है तेरे तरस करो,
भूखे है शोहरत के,तलबगार नही है।
====================

भर पेट खाना,बदन को छत चाहिए,
हे,राजन सिवाय तेरे मददगार नही है।
====================

इक सपना देखा तुमने है ये याद हमे ,
मत कहना तुम ये मेरे उदगार नही है।
====================

तुमने कहा मैं हवाई सफर कराऊँगा,
‘जैदि’ जिनके खुद के आगार नही है।
====================

Dr.L.C. Zaidi

शायर:-“जैदि”
डॉ.एल.सी.जैदिया “जैदि”
बीकानेर।

मायने:-
पगार:-मेहनताना
उदगार:- दिल के विचार
तलबगार:- इच्छा
आगार:-मकान (रहने का स्थान)

यह भी पढ़ें:-

आज़ादी | Hindi Poem Azadi

Similar Posts

  • महाकुंभ

    ग़ज़ल ( महाकुंभ विशेष) आस्था की है लगी डुबकी सदा देखाभक्ति के नव रंग में सबको रँगा देखा कुंभ मेला को इलाहाबाद के पथ परसंत नागा साधुओं से नित भरा देखा भीड़ का उमड़ा हुजूम जयघोष हैं करतेधूल से घुटने पावों तक को सना देखा सूर्य तक उठता नदी जल अंजली में योंआचमन में हाथ…

  • खामोशी | Khamoshi Shayari

    खामोशी ( Khamoshi )    नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…

  • बदले की कहानी किसलिए

    बदले की कहानी किसलिए ( Badle ki Kahani Kisliye ) वक़्त दुहराता है बदले की कहानी किसलिएदिल दुखायें जो वो बातें दिल में लानी किसलिए ज़ुल्म ढ़ाकर मेरे दिल पर रो रहे हैं आप क्यों,मेरे बंजर दिल पे आख़िर मेहरबानी किसलिये । जब मुकम्मल ही नहीं होने ये किस्से इश्क़ केफिर शुरू मैं भी करूँ…

  • वोटर ज़हीन हो जाये | Voter Zaheen ho Jaye

    वोटर ज़हीन हो जाये ( Voter zaheen ho jaye )    इक मुहब्बत का सीन हो जाये चाय सँग चाऊमीन हो जाये इक झलक महजबीन हो जाये इश्क़ ताज़ातरीन हो जाये दिल का कमरा है खाली मुद्दत से कोई इसमें मकीन हो जाये बैठ जाओ जो रूबरू मेरे यह ग़ज़ल बेहतरीन हो जाये गुफ्तगू प्यार…

  • हम रोते हैं | Hum Rote Hain

    हम रोते हैं ( Hum Rote Hain ) दुख में तन्हा हम रोते हैंसुख में शामिल सब होते हैं खार ही खार दिखे हैं हर सूहम हर सू जब गुल बोते हैं फ़सलों पर हक़ ग़ैर जतायेंखेत तो जब हमने जोते हैं लालच के रथ पर जो बैठेंअपना भी वो धन खोते हैं उनके आँसू…

  • यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

    यह जो उर्दू ज़बान है साग़र मीर ग़ालिब की जान है साग़रयह जो उर्दू ज़बान है साग़र उर्दू सुनते ही ऐसा लगता हैगोया बंशी की तान है साग़र बेसबब आज हिंदी उर्दू मेंहो रही खींचतान है साग़र उर्दू को माँ कहो या तुम मौसीएक ही खानदान है साग़र मेरी ग़ज़लों में उर्दू के दम सेघुल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *