हम ने देखा है

हम ने देखा है | Ghazal Hamne Dekha hai

हम ने देखा है

( Hamne dekha hai )

नारसीदा से किसी पैमान सी।
हर ख़ुशी है कॉंच के गुलदान सी।

हम ने देखा है बहुत ही ग़ौर से।
ज़िन्दगी है जंग के मैदान सी।

कहने को दाना बहुत है दिल मगर।
हरकतें करता है कुछ नादान सी।

काम देखो तो हैं शैतां से बुरे।
वैसे उसकी शक्ल है इन्सान सी।

हम भी शरमाते हैं अब मिलते हुए।
वो भी घर आती है अब मेहमान सी।

सैंकड़ों मतलब हैं इसके दोस्तो।
बात है वैसे मिरी आसान सी।

कैसा यह जश्न-ए-बहारां है फ़राज़।
हर गली है मुन्जमिद सुनसान सी।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

तेरी अदाएं | Geet Teri Adayein

Similar Posts

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • हज़ल | Hazl

    इलेक्शन पास जबसे इलेक्शन है आने लगे तबसे नेताजी सर्कस दिखाने लगे ये है बापू का गुलशन यहां पर मगर डाकु, गुंडे हुकुमत चलाने लगे जबसे महंगी हुई है विदेशी शराब देसी दारू वो पीने पिलाने लगे मारना मच्छरों का जिन्हें पाप है रोज़ मुर्गा,मटन वो भी खाने लगे नौकरी रिटायर हम जो हुए घर…

  • सनम का हाल | Ghazal Sanam ka Haal

    सनम का हाल ( Sanam ka Haal ) बह्र : बहरे हज़ज मुसद्दस सालिम अरकान: मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मात्रा भार : 1222 1222 1222   हसीं चेहरा गुलाबी गाल अच्छा है, हाथों तूने लिया रुमाल अच्छा है ! मचलती इस जवानी पर खिला यौवन, तेरी जुल्फों का बिखरा हाल अच्छा है ! मेरे जैसे दिवाने…

  • हमने देखी है | Hamne Dekhi Hai

    हमने देखी है ( Hamne Dekhi Hai ) वह्म जैसी कोई बला ही नहीं।इस मरज़़ की कहीं दवा ही नहीं। हमने देखी है हम बताएंगे।हिज्र जैसी कोई सज़ा ही नहीं। लाख कोशां रहे अ़दू लेकिन।क़द हमारा कभी घटा ही नहीं। ज़ुल्म ढाता है रात दिन फिर भी।उसकी नज़रों में ये ख़ता ही नहीं। अ़हदे ह़ाज़िर…

  • आँख का नूर बनो तो सही | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

    आँख का नूर बनो तो सही ( Aankh ka noor bano to sahi )   बात दिल की कभी तुम कहो तो सही सिर्फ तुम दिल में मेरे रहो तो सही प्रीति की रोशनी जगमगा दो हृदय दीप बाती-सरिस तुम जलो तो सही जिन्दगी का है लम्बा सफर साथ में दूर कुछ हमसफर तुम चलो…

  • आज़म क्यों न उदास रहे | Dil Udaas hai Shayari

    आज़म क्यों न उदास रहे ( Aazam kyon na udaas rahe )    उल्फ़त का गाया साथ नग्मात नहीं है? प्यार की करी कोई भी बात नहीं है तक़दीर न जानें कैसी है अपनी तो उल्फ़त को क्यों होती बरसात नहीं है वरना प्यार वफ़ा मिलती हर पल उसको समझे उसने दिल के जज़्बात नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *