ग़ज़ल

  • भर भर दुआ देने लगे

    भर भर दुआ देने लगे हम बुज़ुर्गों पर तवज्जो जब ज़रा देने लगेवो मुहब्बत से हमें भर-भर दुआ देने लगे घर के आँगन में खड़ी दीवार जब से गिर गयीनाती पोतों के तबस्सुम फिर मज़ा देने लगे मिट गये शिकवे गिले जब भाइयों के दर्मियाँएक दूजे के मरज़ में वो दवा देने लगे आ रहींं…

  • ग़ज़ल – हिंदी

    ग़ज़ल – हिंदी हिंदी गाँधी के सपनों का अभियान हैइसके विस्तार में सबका सम्मान है सूर तुलसी ने सींचा इसे प्यार सेजायसी और रसखान की जान है राम सीता हैं इसमें हैं राधा किशनमीरा के प्रेम का भी मधुर गान है चाहे कविता लिखो या कहानी लिखोइसकी शैली में सब कुछ ही आसान है हिंदी…

  • देख लो तुम भी आईना फिर से

    देख लो तुम भी आईना फिर से देख लो तुम भी आईना फिर सेलौट ये पल न पायेगा फिर से चाहते क्या होके जुदा फिर सेबन न पाओगे तुम खुदा फिर से मुझको होना नहीं फ़ना फिर सेरात दिन माँगता दुआ फिर से यूँ न निकलो सँवर के तुम बाहरहो न जाये कहीं खता फिर…

  • हमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये

    हमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये राजा पे रख दिए न तो रानी पे रख दियेहमने तो सारे दाँव जवानी पे रख दिये सागर, शराब, जाम कसौटी पे रख दियेउसने हिज़ाब जब मेरी मर्ज़ी पे रख दिये मय-ख़्वार जब शराब से तौबा न कर सकाइल्ज़ाम मयकशी के उदासी पे रख दिये सादा मिज़ाजी…

  • मेरी परवरिश का असर देखते हैं

    मेरी परवरिश का असर देखते हैं मेरी परवरिश का असर देखते हैंवो घर को मेरे इस कदर देखते हैं किताबों में जिनका असर देखते हैंकभी भी नहीं उनका घर देखते हैं पलट वार हमने किया ही कहाँ कबअभी तक तो उनका हुनर देखते हैं मिलेगी न हमको यहां मौत ऐसेचलो साँस को बेचकर देखते हैं…

  • मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछो

    मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछो मुहब्बत के झूठे रिवाजों से पूछोवफ़ा चाहतों के फ़सानों से पूछो यहाँ बंद सारे मकानों से पूछोगिरी गाज जिन उन किसानों से पूछो छुपा कौन दिल के खयालों में मेरेउन्हीं के सुनों तुम इशारों से पूछो रुलाया यहाँ कौन है चालकों कोयहां पे खड़े मेज़बानों से पूछो वफ़ा का…

  • दिल में हमारे आज भी

    दिल में हमारे आज भी ( ‘वाचाल’ ग़ज़लमतलआ छोड़कर सारे अश्आर तिटंगे ) दिल में हमारे आज भी अरमान पल रहा हैयूँ मानिए कि दिल को ये दिल ही छल रहा है रंगे-निशात झेला बारे-अलम उठा करना जाने किस बिना पर ये साँस चल रहा हैजुड़ता है टूट-टूट कर फ़िर-फ़िर संभल रहा है वो पूछते…

  • होली में

    होली में किया जख़्मी उसी ने है मुझे हर बार होली मेंगुलो के रंग से मुझपर किया जो वार होली में नही रूठों कभी हमसे भुला भी दो गिले सारेतुम्हारे ही लिए लाएँ हैं हम यह हार होली में रही अब आरजू इतनी कि तुमसे ही गले लगकरबयां मैं दर्द सब कर दूँ सुनों इस…

  • प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार

    प्रकृति का अद्भुत श्रृंगार ( 2222 2222 222 )निर्मल गंगा सी धारा तुम बहती होशबनम के मोती जैसी तुम लगती हो चंद्रप्रभा रातों की सुंदरता में तुमआँचल बन कर फैली नभ में दिखती हो यूँ लगता है जैसे ऊँचे परबत सेकल-कल करती झरने जैसी बहती हो फूलों की कोमल पंखुड़ियों के जैसेभँवरे की प्रीती की…

  • चालाकियां चलता रहा

    चालाकियां चलता रहा ( ग़ज़ल : दो काफ़ियों में ) मुफ़लिसी से मेरी यूँ चालाकियाँ चलता रहाज़हनो-दिल में वो मेरे ख़ुद्दारियाँ भरता रहा मैं करम के वास्ते करता था जिससे मिन्नतेंवो मेरी तक़दीर में दुश्वारियाँ लिखता रहा मोतियों के शहर में था तो मेरा भी कारवाँफिर भला क्यों रेत से मैं सीपियाँ चुनता रहा कहने…