हर घड़ी इस साल की

हर घड़ी इस साल की

हर घड़ी इस साल की

हो मुबारकबाद सबको हर घड़ी इस साल की
साल भर रौनक़ रहे घर घर में इस्तकबाल की

कीजिएगा सब दुआएं उम्र भर फूले फलें
दिल को छू पाये नहीं कोई हवा जंजाल की

गुज़रे ऐ मौसम बहाराँ तू चमन में इस तरह
ख़ूबसूरत ज़िन्दगी हो हर शजर हर डाल की

दूध माखन और मिश्री का लगाकर भोग सब
लोग जय जयकार बोलें नन्द के गोपाल की

लोग अपनाने लगें फिर से स्वदेशी चीज़ को
बंद कर दें सब खरीदारी विदेशी माल की

टूटी सड़कें बन रही हैं और शासन चुस्त है
आ रही है राजशाही की इधर से पालकी

मुन्तज़िर आँखें हैं साग़र बस इसी उम्मीद पर
खैरियत लेने को आओगे कभी बेहाल की

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

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