ग़ज़ल

  • दिल्लगी अच्छी नहीं है

    दिल्लगी अच्छी नहीं है यक़ीं मानो मिरे जानी नहीं हैं।ज़ियादा दिल्लगी अच्छी नहीं है। किसी पर मालो-दौलत के जबल हैं।किसी पर एक भी रत्ती नहीं है। दसों कर डाले उसको फ़ोन लेकिन।वो आने के लिए राज़ी नहीं है। ख़ुशी से सैंकड़ों मेह़रूम हैं,पर।ग़मों से कोई भी ख़ाली नहीं है। हज़ारों राज़ पोशीदा हैं इसमें।हमारी बात…

  • उसे पास बुलाते क्यों हो

    उसे पास बुलाते क्यों हो टूटने है जो मरासिम वो निभाते क्यों होदूर जाता हो उसे पास बुलाते क्यों हो। वक्त माकूल नहीं हो तो बिगड़ती चीज़ेंदौर-ए-तूफाॅं में चिराग़ों को जलाते क्यों हो। तुम हमारे हो फ़कत है ये नवाज़िश हम परबस गिला ये है कि एहसान जताते क्यों हो। आइना सबको दिखाकर के गिनाकर…

  • निकल गया | Nikal Gaya

    निकल गया ऐसे वो आज दिल के नगर से निकल गया।जैसे परिन्द कोई शजर से निकल गया। किस रूप में वो आया था कुछ तो पता चले।बच कर वो कैसे मेरी नज़र से निकल गया। क्यों कर न नफ़़रतों का हो बाज़ार गर्म आज।जज़्बा-ए-इ़श्क़,क़ल्बे-बशर से निकल गया। उस दिन ही मेरे दिल के महक जाएंगे…

  • मस्तियों में जी मैंने

    मस्तियों में जी मैंने शराबे – शौक़ निगाहों से उसकी पी मैंनेतमाम उम्र बड़ी मस्तियों में जी मैंने हज़ारों किस्म की चीज़ों से घर सजाया थातुम्हारे शौक़ में रख्खी नहीं कमी मैंने जुनून ऐसा चढ़ा था किसी को पाने कालगाई दाँव पे हर बार ज़िन्दगी मैंने हज़ारों ग़म थे खड़े ज़िन्दगी की गलियों मेंहरेक मोड़…

  • हमेशा रहे बेसहारों में शामिल

    हमेशा रहे बेसहारों में शामिल रहे तनहा होकर हज़ारों में शामिलहमेशा रहे बेसहारों में शामिल सदा ही रही है ख़ुशी दूर हमसेरहे हम सदा ग़मगुसारों में शामिल नहीं बन सके हम महाजन कभी भीसदा ही रहे देनदारों में शामिल ज़मीं पे मिलन हो न पाया हमाराचलो होंगे अब हम सितारों में शामिल मिली हमको मन…

  • क्या कहूँ | Kya Kahoon

    क्या कहूँ क्या कहूँ दिल ने मुझे उल्फ़त में पागल कर दियाथोड़ा में पहले से था उसने मुकम्मल कर दिया अपनी आँखों का सनम तूने तो काजल कर दियाआँख से छूकर बदन को तूने संदल कर दिया शह्र में चर्चे बड़े मैला ये आँचल कर दियाक्या कहें दिल रूह को भी मेरी घायल कर दिया…

  • रह गए हम | Rah Gaye Hum

    रह गए हम हम नज़र होते होते रह गए हमहमसफ़र होते होते रह गए हम शब में लगने लगा मुकम्मल हैऔर सहर होते होते रह गए हम हमने सोचा किसी के हो जाएँहाँ मगर होते होते रह गए हम बस कहानी थी यूँ तो कहने कोचश्मे-तर होते होते रह गए हम साथ हमने बाताए सात…

  • भला क्या माँगा

    भला क्या माँगा तुझ से दिलदार से मैंने भी भला क्या माँगातेरे जलवों से शब-ए-ग़म में उजाला माँगा तेरी रहमत ने जो भी फ़र्ज़ मुझे सौंपे हैंउनको अंजाम पे लाने का वसीला माँगा हर ख़ुशी इनके तबस्सुम में छुपी होती हैरोते बच्चों को हँसाने का सलीक़ा माँगा तू है दाता हैं तेरे दर के भिखारी…

  • छोड़ दे ऐब को

    छोड़ दे ऐब को छोड़ दे ऐब को, तख़सीस ,दुआ तू रख लेअपने असलाफ़ के अख़लाक़ की तू बू रख ले तू सलीके से पहुँच जाए बुलंदी पे भीख़ार दे गुल के मुझे और तू ख़ुशबू रख ले है फ़रेबी ये जहाँ लोग तमाशाई भीमत बिफर नादां तू गुस्से पे भी काबू रख ले मिल…

  • क्या कहने | Kya Kahne

    क्या कहने इक तो जुल्फें दराज़, क्या कहनेउसपे बाहें ग़ुदाज़, क्या कहने मुँह को तेड़ा किये यूँ बैठे हैंहुस्न और उसपे नाज़, क्या कहने अहले-दुनिया को ताक पर रख करएक उसका लिहाज़, क्या कहने जब भी गाऐ तो अंदलीब लगेउस पे परवाज़-ए-बाज़, क्या कहने गुफ़्तुगू भी पहेलियों जैसीऔर आँखों में राज़, क्या कहने कल तलक…