यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

मीर ग़ालिब की जान है साग़र
यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

उर्दू सुनते ही ऐसा लगता है
गोया बंशी की तान है साग़र

बेसबब आज हिंदी उर्दू में
हो रही खींचतान है साग़र

उर्दू को माँ कहो या तुम मौसी
एक ही खानदान है साग़र

मेरी ग़ज़लों में उर्दू के दम से
घुल रहा जाफ़रान है साग़र

देखो दरियादिली तो उर्दू की
मुझ पे भी मेहरबान है साग़र

इसकी बू से ग़ज़ल महकती है
उर्दू वो गुलसितान है साग़र

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तुम्हारा नाम | Tumhara Naam

    तुम्हारा नाम ( Tumhara Naam ) न याद-ए-आब-जू आए न याद-ए-आबशार आए।तुम्हारा नाम ही लब पर हमारे बार-बार आए। रहें होश-ओ-हवास़ अपने सलामत उस घड़ी या रब।हमारे सामने जिस दम जमाल-ए-ह़ुस्ने-यार आए। अभी दौर-ए-ख़िजां है तुम अभी से क्यों परेशां हो।सजा लेना नशेमन को गुलों पर जब निखार आए। सजा रक्खी है जिसके वास्ते यह…

  • वो चार लोग थे | Wo Char Log The

    वो चार लोग थे ( Wo Char Log The ) झूठों के बादशाह थे मक्कार लोग थेहमको सही जो कहते थे वो चार लोग थे इल्ज़ाम झूठा हम पे लगाते थे बेसबबक़ातिल थे ख़ुद ही और गुनहगार लोग थे वल्लाह बेज़ुबा थे यूँ मज़लूम भी बड़ेरहते थे बंदिशों में भी लाचार लोग थे चालें समझते…

  • तुम्हारे बाद | Tumhare Baad

    तुम्हारे बाद ( Tumhare Baad ) साँसें थमी हैं ख़त्म भी किस्सा तुम्हारे बादबिखरा है मेरा जिस्म सरापा तुम्हारे बाद कतरे से हो गए हैं समुंदर तवील सेख़ुद पे रहा न हमको भरोसा तुम्हारे बाद कैसे सुनाएं बज़्म में क़िस्सा-ए-इश्क़ हमशाइर बना है दिल ये हमारा तुम्हारे बाद मझधार में खड़े हैं मनाज़िर अजीब हैंकैसे…

  • मुलाक़ात कीजिए | Mulaqaat Kijiye

    मुलाक़ात कीजिए ( Mulaqaat Kijiye ) काबू में पहले अपने ये जज़्बात कीजिएफिर चाहे जैसे हमसे मुलाक़ात कीजिए जिस में ख़ुशी हो आप की वोही करेंगे हमज़ाहिर तो अपने आप ख़यालात कीजिए फ़ुर्क़त की धूप सहने- चमन को जला न देशिकवे भुला के प्यार की बरसात कीजिए अफ़साना मत बनाइये छोटी सी बात कामुद्दे की…

  • मैं भी था | Main Bhi Tha

    मैं भी था तुम्हारे हुस्न-ओ-अदा पर निसार मैं भी थातुम्हारी तीर-ए-नज़र का शिकार मैं भी था मेरे गुनाह ख़ताएं भी फिर गिना मुझकोतेरी नज़र में अगर दाग़दार मैं भी था बहुत ही ख़ौफ़ ज़माने का था मगर सचमुचतुम्हें भी अपना कहूँ बेकरार मैं भी था यक़ी न होगा तुझे पर यही हक़ीक़त हैहसीं निगाहों का…

  • मस्तियों में जी मैंने

    मस्तियों में जी मैंने शराबे – शौक़ निगाहों से उसकी पी मैंनेतमाम उम्र बड़ी मस्तियों में जी मैंने हज़ारों किस्म की चीज़ों से घर सजाया थातुम्हारे शौक़ में रख्खी नहीं कमी मैंने जुनून ऐसा चढ़ा था किसी को पाने कालगाई दाँव पे हर बार ज़िन्दगी मैंने हज़ारों ग़म थे खड़े ज़िन्दगी की गलियों मेंहरेक मोड़…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *