यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

मीर ग़ालिब की जान है साग़र
यह जो उर्दू ज़बान है साग़र

उर्दू सुनते ही ऐसा लगता है
गोया बंशी की तान है साग़र

बेसबब आज हिंदी उर्दू में
हो रही खींचतान है साग़र

उर्दू को माँ कहो या तुम मौसी
एक ही खानदान है साग़र

मेरी ग़ज़लों में उर्दू के दम से
घुल रहा जाफ़रान है साग़र

देखो दरियादिली तो उर्दू की
मुझ पे भी मेहरबान है साग़र

इसकी बू से ग़ज़ल महकती है
उर्दू वो गुलसितान है साग़र

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

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