Dil khafa
Dil khafa

मत दिखा दिल ख़फ़ा रोज यूं और तू !

( Mat dikha dil khafa roj yoon aur tu )

 

मत दिखा दिल ख़फ़ा रोज यूं और तू !
बांध दिल से वफ़ा की मगर डोर तू

 

प्यार से पेश आता नहीं अपनों से
आ गया है कैसा देखले दौर तू

 

हर घड़ी खोया रहता तुझे में बहुत
बन गया मेरे दिल का मगर चोर तू

 

दिल करे देखता मैं यूं ही मैं
चाल ऐसी तेरी जैसे हो मोर तू

 

और कोई नहीं मंजिल तेरे सिवा
प्यार का ए सनम मेरे वो छोर तू

 

फूल इंकार कर प्यार का मत सनम
जोड़ले प्यार की आज़म से डोर तू

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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