Category: शेरो-शायरी

  • प्यार के वो मैं इशारे ढूँढता हूँ | Pyar shayari

    प्यार के वो मैं इशारे ढूँढता हूँ ( Pyar ke woh main ishare dhoondta hoon )     प्यार के  वो मैं इशारे ढूंढ़ता हूँ ऐसे आंखों के सहारे ढूंढ़ता हूँ   जिंदगी को दें ख़ुशी जो ये हमेशा शहर में ही वो गुजारे ढूंढ़ता हूँ   प्यार के डूबा हूँ मैं  दरिया में ऐसा…

  • खुशियों से ही गरीब हूं मैं | Ghazal

    खुशियों से ही गरीब हूं मैं ( Khushiyon se hi gareeb hoon main )     जीस्त में नहीं इतना खुशनसीब  हूँ मैं तो इस जहां में खुशियों से ही ग़रीब हूँ मैं तो   इसलिए  सभी होते है ख़िलाफ़ मेरे ही सबसे बोल देता हूँ सच अजीब हूँ मैं तो   मार मत न…

  • करे है उससे फ़ासले हम नहीं | Ghazal

    करे है उससे फ़ासले हम नहीं ( Kare hai usse faasle hum nahi )   करे है उससे फ़ासिले हम नहीं दग़ा प्यार में ही करे हम नहीं   चुनी है मुहब्बत की राहे हमने नफ़रत की राहों पर चले हम नहीं   बेअदबी करी घर बुलाकर अपनें उसके रु ब रु फ़िर हुये हम…

  • इसलिए फूल भेजा नहीं प्यार का | Ghazal

    इसलिए फूल भेजा नहीं प्यार का ( Isaliye phool bheja nahin pyar ka )     इसलिए फ़ूल भेजा नहीं प्यार का! था फ़रेबी से भरा दिल बहुत यार का   इसलिए ख़त लिख पाया नहीं हूँ उसे बेवफ़ा दिल है उस यार दिलदार का   रिश्ता रखना है तो रख वरना तोड़ दें यूं…

  • नहीं दिल तू कभी अपना ख़फ़ा रखना | Khafa shayari

    नहीं दिल तू कभी अपना ख़फ़ा रखना ( Nahi dil tu kabhi apna khafa rakhna )     नहीं दिल तू कभी अपना ख़फ़ा रखना मुहब्बत का हमेशा वास्ता रखना   हमेशा साथ रहना हम सफ़र बनकर नहीं मुझसे कभी खुद को जुदा रखना   मुसीबत दूर तुझसे ही रहेगी हर लबों पे रोज़ तू…

  • उल्फ़त में | Ghazal ulfat mein

    उल्फ़त में ( Ulfat mein )   उल्फ़त में  ऐ यार किसी की ऐसा लूटे है क्या हाल सुनाये इतना अंदर से टूटे है   क्या है तेरा मेरा रिश्ता समझें क्या तुझको ख़्वाबों से तेरे रोज़ सनम हम महके है   जो चाहे हम हल हो पाता काम नहीं कोई दौड़े है बद क़िस्मत…

  • समुन्दर खुमार का | Ghazal samundar khumar ka

    समुन्दर खुमार का ( Samundar khumar ka )   पलकों पे छुपा है जैसे कुछ,समुन्दर खुमार का। कितना अजब नशा है दिलवर के, इन्तजार का।   ख्वाबों में माँगते है हर पल, मन्नत दीदार का। उनपे भी कुछ असर हो जाए, मेरे प्यार का।   बढती ही जा रही है उसके, चाहत का ये सरूर।…

  • दादा जी | Dada ji par Shayari

    दादा जी ( Dada JI )   यहां तो दादा जी रकीब है नहीं कोई अपना हबीब है   रवानी ख़ुशी की कैसे हो फ़िर ख़ुशी जिंदगी से सलीब है   घरों में  हुये लोग कैद सब चला कैसा मौसम अजीब है   कैसे लें आटा दाल यूं महंगा दादा जी बड़े हम ग़रीब है…

  • दिल से जाये नहीं प्यार मैं क्या करुं | Ghazal

    दिल से जाये नहीं प्यार मैं क्या करुं ( Dil se jaye nahi pyar main kya karoon )     दिल से जाये नहीं प्यार मैं क्या करुं हिज्र  में  तेरे  अब यार मैं क्या करुं   भूलने की तुझे कोशिका की तमाम भूल पाऊं न दिलदार मैं क्या करुं   इंतिहां हो गयी  है…

  • मुझको मेरी ज़मीं पे रहने दो | Ghazal

    मुझको मेरी ज़मीं पे रहने दो ( Mujhko meri zameen pe rehne do )     ‘हाँ मैं हूँ’ इस यकीं पे रहने दो। मुझको मेरी ज़मीं पे रहने दो।   पोछ लो अपने आस्ताँ का लहू, दाग़ मेरी जबीं पे रहने दो।   तेरी यादों से ही उजाला है, चाँद को अब वहीं पे…