छठ पूजा महापर्व

छठ पूजा महापर्व

छठ पूजा महापर्व

आया पर्वो का पर्व महापर्व,
छठी मैया की पूजा का पर्व।
दशहरा दिवाली के बाद ,
छठी पूजा है हमारा गर्व।।

लोकगीतों से शुरू होता है,
परंपराओं से जुड़ा हुआ है।
है त्यौहार यह अलौकिक,
मान्यताओं से घिरा हुआ है।।

बड़ा अनोखा है इसका इतिहास,
छठी पर्व की जिन्होंने किया शुरुआत।
मंगल कार्य है यह पूजा,
विशेष महत्व है इसे प्राप्त।।

सूर्य की शक्तियों का स्रोत,
छठी पर्व का मुख्य उद्देश्य।
हर मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है ,
मिला पांडवों को जुएं में हारा राजपाट।।

नहाए खाए से शुरू होता है,
चार दिवसीय यह त्यौहार।
36 घंटे की कठिन तपस्या है,
व्रती करती है इसको नियमों अनुसार।।

Lata Sen

लता सेन

इंदौर ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • युगों से नारी | Yugon se Nari

    युगों से नारी ( Yugon se nari ) ( मणिपुर में हुई बर्बरता की घटना से मेरा संवेदनशील ह्रदय सिहर उठा है उसी पीड़ा से उत्पन्न हुई मैं यह अपनी कविता आप के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ )    आज भी भ्रमण कर रही है नारी युगों पुरानी धुरी पर द्रौपदी की भाँति अपनी…

  • संयम करना सिखा दिया

    संयम करना सिखा दिया तेरे प्यार ने सिखा दिया, कैसे दर्द को हँसते हुए सहना है। तुझे अपनी यादों में बसाकर, तुझमें ही खोया रहना है। तेरे ख्यालों ने समझाया, दूरी को कैसे सहेजा जाता है। तेरी याद मात्र से भी मुस्काना, यह प्यार में कितना मज़ा आता है। तेरी बातों की मिठास, हर दर्द…

  • Kavita On Chandrashekhar Azad -चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन

    चन्द्रशेखर आजाद को श्रद्धा सुमन ( Chandrashekhar Azad Ko Shradha Suman ) भारत  भूमि  जब  जब  सम्मान  से  सिर झुकायेगी हर मुकाम पर हिन्द को चन्द्रशेखर की याद आयेगी   ऐसा किया ऊँचा मस्तक भारत गौरव के अभिमान का धूल चटाकर प्राण हरे खुद दृश्य सन 31 के सग्राम का   आजाद  हिंद  फौज  से…

  • कर्तव्य पथ पर | Kavita Kartavya Path Par

    कर्तव्य पथ पर ( Kartavya path par )    मैं डट कर स्थिर खड़ी रहूँगी, कर्तव्य पथ पर निरंतर चलूंगी। किसी प्रहार से कोशिश छोडूंगी नहीं। हाथ किसी के आगे जोडूंगी नहीं, वरदान किसी भगवान से माँगूंगी नहीं।। परिस्थितियां चाहे जो कर ले, समय से मात खा कर गिरूँगी नहीं। हवायें चाहे अपना रुख मोड़…

  • लता सेन की कविताएं | Lata Sen Hindi Poetry

    हरियाली प्रकृति का श्रृंगार प्रकृति का श्रृंगार हरियालीजीवन का आधार हरियाली देखो धरती की बदली है कायाप्रकृति ने ओढ़ी हरि चुनरियानजारों ने आंखों को लुभायामहक उठे फुल चारों ओर छाई हरियाली ।प्रकृति का श्रृंगार हरियालीजीवन का आधार हरियाली ……. देख इस सब हैं हर्षातेमन ही मन है मुस्कातेनहीं करती यह भेदभावसबको करती उल्लासित हरियाली।प्रकृति का…

  • निजी आजादी | Niji Zindagi

    निजी आजादी ( Niji zindagi )    गलत को गलत यदि कह न सको तो गलत का साथ भी गलत ही होगा स्वयं को निर्दोष समझने से पहले अपनी भूमिका भी माननी होगी… दुनियां के उसूलों के साथ चलना स्वयं को गुलाम बना लेना है विशिष्टता मे लोग अलग कुछ नही करते ढंग ही उनका…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *