तेरा इक दिवाना हूँ

तेरा इक दिवाना हूँ

तेरा इक दिवाना हूँ क़ाफ़िर नहीं हूँ
असल में जो मैं हूँ वो जाहिर नहीं हूँ

जुबाँ हूँ अदा-ए-फिजा हूँ फ़ना हूँ
यक़ीनन मैं जो हूँ क्यों आखिर नहीं हूँ

जहाँ तक तिरा साथ मुझको चलूँगा
युँ कुछ वक्त का मैं मुसाफ़िर नहीं हूँ

लिखूँगा मैं लिखता नया ही रहूँगा
थकूँ राह में ऐसा शाइर नहीं हूँ

खबरदार हूँ वक्त से अपने यूँ तो
कहीं से कभी गैर-हाजिर नहीं हूँ

लगा लो न सीने से मुझको अभी तुम
झुकाओ न सिर देव-मंदिर नहीं हूँ

कदरदान हूँ मैं मुहब्बत का तेरे
किसी मुल्क़ का तो मैं आमिर नहीं हूँ

Dr. Sunita Singh Sudha
डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • किसी के इ़श्क़ में | Kisi ke Ishq Mein

    किसी के इ़श्क़ में ( Kisi ke Ishq Mein ) बेफ़ैज़ ज़िन्दगानी का अफ़साना बन गया।दिल क्या किसी के इ़श्क़ में दीवाना बन गया। फूलों के मिस्ल खिल गया हर ज़ख़्म का निशां।जो ज़ख़्म उसने दे दिया नज़राना बन गया। वो थे क़रीबे क़ल्ब तो ह़ासिल थे लुत्फ़ सब।जाते ही उनके घर मिरा ग़म ख़ाना…

  • भर भर दुआ देने लगे

    भर भर दुआ देने लगे हम बुज़ुर्गों पर तवज्जो जब ज़रा देने लगेवो मुहब्बत से हमें भर-भर दुआ देने लगे घर के आँगन में खड़ी दीवार जब से गिर गयीनाती पोतों के तबस्सुम फिर मज़ा देने लगे मिट गये शिकवे गिले जब भाइयों के दर्मियाँएक दूजे के मरज़ में वो दवा देने लगे आ रहींं…

  • भागे है सब अदू | Bhaage hai Sab Adoo

    भागे है सब अदू ( Bhaage hai sab adoo )    भागे है सब अदू देख कश्मीर से काट डाले सभी देखो शमशीर से सैनिको ने बिखरे फूल हर राह पर है अमन प्यार की इस तासीर से चैन से हंस रहा देख कश्मीर अब सब मिटा डाले दुश्मन जागीर से दुश्मन आयेगा कश्मीर में…

  • चलन में है अब | Chalan mein

    चलन में है अब ( Chalan mein hain ab )   सीने को खोलने का फैशन चलन में है अब और गाली बोलने का फैशन चलन में है अब देखो ज़रा संभल के तुम बात कोई बोलो कम करके तोलने का फैशन चलन में है अब ये दूध जैसी रंगत आई नहीं है यूं ही…

  • कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखो

    कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखो कभी तुम प्यार से बस इक नज़र देखोफ़क़त मुझ को भी अपना मान कर देखो विरासत में नहीं मिलते ख़ुशी के पलये काँटों से भरा मेरा सफ़र देखो लक़ब मुझ को मिले जो अब तलक सारेमिरी माँ की दुआ का है असर देखो अगर जो प्यार में…

  • हज़ल | Hazl

    इलेक्शन पास जबसे इलेक्शन है आने लगे तबसे नेताजी सर्कस दिखाने लगे ये है बापू का गुलशन यहां पर मगर डाकु, गुंडे हुकुमत चलाने लगे जबसे महंगी हुई है विदेशी शराब देसी दारू वो पीने पिलाने लगे मारना मच्छरों का जिन्हें पाप है रोज़ मुर्गा,मटन वो भी खाने लगे नौकरी रिटायर हम जो हुए घर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *