Chintan par Chhand

चिंतन | Chintan par Chhand

चिंतन

( Chintan ) 

मनहरण घनाक्षरी

 

विद्वान चिंतक हुए, पथ प्रदर्शक भारी।
देश का उत्थान करे, चिंतन भी कीजिए।

मंथन हो विचारों का, उर भाव उद्गारों का।
जनहित सरोकार, अमल में लीजिए।

वादों की भरमारों को, सत्ता की दरकारों को।
नेताजी की छवि जरा, परख भी लीजिए।

सोचिए विचारिये भी,हृदय उतारिए भी।
चिंतन मनन कर, शब्द मोती दीजिए।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

चंदन | Chandan par Chhand

Similar Posts

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

  • पुलकित | Chhand pulkit

    पुलकित ( Pulkit )  जलहरण घनाक्षरी   कोना कोना पुलकित, सौंधी चली पुरवाई, नव पल्लव बगिया छाई उमंगे भावन। घट घट उल्लास हो, महकती फुलवारी, नजारे मनभावन, चहक उठा सावन। खुशहाली आनंद से, सबकी झोली भरता, गीत बने अधरों पे, ईश्वर नाम पावन। लहर लहर नदी, सागर उमड़ा आता, मनमोहक मुस्कान, पुलकित रहे मन।  …

  • करवा चौथ | Chhand karva chauth

    करवा चौथ ( Karva chauth )   सुहागनें नारी सारी, करवा चौथ मनायें। कर सोलह श्रंगार, गौरी चांद मना रही। मनमीत प्रियतम, प्राण प्यारे भरतार। लंबी जीए उम्र जग, मंगल कामना कहीं। दिलों का पावन रिश्ता, टूटे ना तकरार से। प्रीत का झरना बहे, प्रेम की सरिता बही। धवल चांदनी सुधा, उमड़ा सागर प्रेम। पिया…

  • मोह | Moh chhand

    मोह ( Moh ) मनहरण घनाक्षरी   मोह माया के जाल में, फंस जाता रे इंसान। लोभ मोह तज जरा, जीवन संवारिये।   कोई पुत्र मोह करें, कोई दौलत का लोभ। लालच के अंधे बने, पट्टिका उतारिए।   ना बांधो मोहपाश में, करना है शुभ काज। सद्भावों के फूल खिला, चमन खिलाइए।   ना काया…

  • कोहरा | Kohara par Chhand

    कोहरा ( Kohara  )    मनहरण घनाक्षरी   ठंडी ठंडी हवा चली, शीतलहर सी आई। ओस पड़ रही धुंध सी, देखो छाया कोहरा। ठिठुरते हाथ पांव, बर्फीली हवाएं चली। कुदरत का नजारा, कांप रही है धरा। धुआं धुआं सा छा रहा, धुंधली दिखती राहें। कोहरा की भरमार, संभल चले जरा। पड़ रही ओस बूंदे, पत्तों…

  • बसंत | मनहरण घनाक्षरी | Basant ritu par chhand

    बसंत   हर्षाता खुशियां लाया, सुहाना बसंत आया। बहारें लेकर आया, झूम झूम गाइए।   मधुमास मदमाता, उर उमंगे जगाता। वासंती बयार आई, खुशियां मनाइए।   पीली सरसों महकी, खिली कलियां चहकी। फूलों पे भंवरे छाए, प्रेम गीत गाइए।   प्रीत के तराने छेड़े, मुरली की तान मीठी। मदन मोहन बंसी, मधुर बजाइये।     कवि…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *