Chintan par Chhand

चिंतन | Chintan par Chhand

चिंतन

( Chintan ) 

मनहरण घनाक्षरी

 

विद्वान चिंतक हुए, पथ प्रदर्शक भारी।
देश का उत्थान करे, चिंतन भी कीजिए।

मंथन हो विचारों का, उर भाव उद्गारों का।
जनहित सरोकार, अमल में लीजिए।

वादों की भरमारों को, सत्ता की दरकारों को।
नेताजी की छवि जरा, परख भी लीजिए।

सोचिए विचारिये भी,हृदय उतारिए भी।
चिंतन मनन कर, शब्द मोती दीजिए।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

चंदन | Chandan par Chhand

Similar Posts

  • प्यारे राम | Poem on Shree Ram

    प्यारे राम ( Pyare Ram )  हरिहरण घनाक्षरी आराध्य हमारे राम, जन जन प्यारे राम। दीन रखवारे राम, भजे राम राम सब। कौशल्या के तारे राम, दशरथ प्यारे राम। सबके सहारे राम, आओ मेरे राम अब। सीताराम सीताराम, रघुपति राजा राम। अवध विराजे राम, पीर हरे राम सब। दीनबंधु दुखहर्ता, दया सिंधु प्यारे राम। जग…

  • सादगी | Saadgi par chhand

    सादगी ( Saadgi )  मनहरण घनाक्षरी   सत्य शील सादगी हो, ईश्वर की बंदगी हो। आचरण प्रेम भर, सरिता बहाइये।   संयम संस्कार मिले, स्नेह संग सदाचार। शालीनता जीवन में, सदा अपनाइये।   बोल मीठे मीठे बोलो, मन की अंखियां खोलो। जीवन की नैया भैया, पार कर जाइए।   अभिमान तज सारे, हरि नाम भज…

  • राम | घनाक्षरी छंद

    राम घनाक्षरी छंद ( 8,8,8,7 )   दोऊ भाई लगे प्यारे, बने धर्म के सहारे। फहराने धर्म ध्वजा, आये मेरे श्री राम।। दुखियों के दुख टारे, सब कुछ दिए वारे। वचन निभाने चले, वन को किए धाम।। राम -राज बना आज, पूरन हो सभी काज। बिगड़ी बनाते यही, रे – मन जपो नाम।। राम-राम रटे…

  • फूलों की कली | Phoolon ki kali | Chhand

    फूलों की कली ( Phoolon ki kali ) मनहरण घनाक्षरी   महक गई वादियां, महका चमन सारा। फूलों की कलियां खिली, मधुर चली बहार।   मधुबन में बहारें, झौंका मस्त पवन का। कलियों ने महकाया, लो आने लगी बहार।   विविध भांति पुष्पो ने, सुगंधित कलियों ने। मदमस्त किया समां, सुहानी लगी बयार।   महकते…

  • सरसी छंद : गीत

    सरसी छंद ( Sarsi Chhand ) करते हो किन बातों पर तुम , अब इतना अभिमान ।आज धरा को बना रहा है , मानव ही शमशान ।।करते हो किन बातों पर तुम … भूल गये सब धर्म कर्म को , भूले सेवा भाव ।नगर सभी आगे हैं दिखते , दिखते पीछे गाँव ।।मानवता रोती है…

  • समांं महका दो आज | Chhand

    समांं महका दो आज (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   गीतों का सजाओ साज समां महका दो आज झड़ी बरसाओ ऐसी धूम होनी चाहिए   खूब गाओ छंद गीत मुक्त कंठ नव गीत रस बरसे प्रेम का भाव होना चाहिए   शौर्य पर लिखो गीत योद्धा जंग जाए जीत हिम्मत हौसला मिले ओज होना चाहिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *