Choti choti khushiyan

छोटी छोटी खुशियां | Choti choti khushiyan chhand

छोटी छोटी खुशियां

( Choti choti khushiyan )

 

बालक की मुस्कान भी,
धीरे-धीरे तुतलाना।
छोटी-छोटी खुशियों से,
आंगन महक रहा।

 

जन्मदिन वर्षगांठ,
शादी विवाह घर में।
प्यारे प्यारे बोल मीठे,
मनवा चहक रहा।

 

हर्ष खुशी घर आए,
सबसे प्रेम जताये।
अनमोल मोती प्रेम,
मन में बरस रहा।

 

मेहमानों का आदर,
सम्मान सबका करें।
यश कीर्ति वैभव से,
भाग्य भी संवर रहा।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

मोह | Moh chhand

Similar Posts

  • निष्पक्ष मतदान | Nishpaksh Matdan

    निष्पक्ष मतदान ( Nishpaksh matdan )   निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान अष्टादश वय पार हर नागरिक, अधिकृत अप्रतिम मत प्रयोग । निर्वहन अहम अनूप भूमिका, निर्मित लोकतंत्र सुखद जोग । राष्ट्र धर्म प्रतिज्ञा अनुपालन, उरस्थ चित्र समृद्ध हिंदुस्तान । निर्भीक निष्पक्ष मतदान, सजग नागरिक पहचान ।। देश सेवा तत्पर कर्तव्य निष्ठ , सुयोग्य…

  • मन की बात | Kavita Man ki Baat

    मन की बात  ( Man ki baat )    मेरा मन बोला मुझ को जाना देश सेवा अब मुझ को करना भारत सेना का बनूंगा हिस्सा रचना है मुझको कोई किस्सा सारा सच बात बता रहें है हम मन की बात सुनकर आ गऐ हम। देश ने जब भी हमको पुकारा बन कर के निर्बल…

  • सोचना आपको है | Sochna Aapko hai

    सोचना आपको है ( Sochna aapko hai )    जानता हूं तुम गलत नही थे कभी न ही बैर था किसी से तुम्हारा गलत रहा तो बस तुम्हारी सोच का नजरिया और तुम्हारी संगत…. अपनों पर किए शक गैरों पर जताया भरोसा मीठी बोली मै रहा व्यंग छिपा आंखों मे दबी वासना रही जल्दबाजी की…

  • मां शारदे | Maa Sharde

    मां शारदे ( Maa Sharde )  ( 3 ) हो ज्ञान का भंडार माँ,यह लेखनी चलती रहे। शुभदा सृजन उपवन खिले,नित ज्योति बन जलती रहे।। कर्तव्य का पथ हो विमल,हर स्वप्न भी साकार हो। पावन रहे ये गंग सी,हर शब्द में रसधार हो।। हो भावना कल्याण की, बस प्रेम का गुंजार हो। रस छंद जीवन…

  • आई फिर जनता की बारी | Kavita Janta ki Bari

    आई फिर जनता की बारी   आने लगे नेता पारापारी, कि आई फिर जनता की बारी। बढ़ी गइल कितनी बेकारी, महंग भइल दाल -तरकारी। बगुला भगत बनि-बनि जइसे आए, वोटवा की खातिर वो दामन बिछाए। घूमें जइसे कोई शिकारी, कि आई फिर जनता की बारी। आने लगे नेता पारापारी, कि आई फिर जनता की बारी।…

  • बुरा क्यूँ मानूँ | Poem bura kyon manu

    बुरा क्यूँ मानूँ ( Bura kyon manu )   तुम मुझसे बात करना नहीं चाहते तो मैं बुरा क्यूँ मानूँ……..     तुम मुझसे मिलना नहीं चाहते हो तो मैं बुरा क्यूँ मानूँ……..   तुम मुझसे ख़फ़ा रहना चाहते हो तो भी मैं बुरा क्यूँ मानूँ……..   तुम मुझसे दूर होना चाहते हो तो मैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *