Pakhi ki Rakhi

धागों का त्योहार

धागों का त्योहार

रंग-बिरंगी राखियों से,आज सजा हुआ बाजार।
अमर – प्रेम का बंधन यारो,है धागों का त्योहार।।

बहना के जीवन में यारो,जब – जब संकट आता।
समाचार के मिलते ही भाई,बहना के घर जाता।।
दिया हुआ वचन अपना भाई सदा ही ये निभाता।
खुशियों की बगियाॅं को भाई,जीवन में महकाता।।

अमर रहे दुनिया में यारो,ये भाई बहन का प्यार।
अमर – प्रेम का बंधन यारो,है धागों का त्योहार।।

सजधज कर राखी पर बहना,भाई के घर आती।
कुम कुम,अक्षत,श्रीफल,मिठाई से थाल सजाती।
आसन पर बैठाकर,फिर मंगल तिलक लगाती।
भाई की कलाई में बांध राखी मिठाई खिलाती।।

आरती करती बहना,भाई देता अनुपम उपहार।
अमर – प्रेम का बंधन यारो,है धागों का त्योहार।।

सीमा पर तैनात सिपाही देश की रक्षा करता है।
सर्दी,गर्मी,बरसात,हमेशा ही सब कुछ सहता है।।
त्योहारों में भी वह,सच्चा प्रहरी बनकर रहता है।
राखी का त्योहार मनाऍं,हर सैनिक ये कहता है।।

प्यारी – बहना रहे जहाॅं भी,ये खुशियाॅं रहे अपार।
अमर – प्रेम का बंधन यारो,है धागों का त्योहार।।

B.S. Singh Chauhan

डॉ. भेरूसिंह चौहान “तरंग”
४रोहिदास मार्ग , झाबुआ
जिला – झाबुआ (म. प्र.)
पिन : ४५७६६१
मो.नंबर : ७७७३८६९८५८

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