अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता

क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता

‘क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता’

अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता,
किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।
ज़िंदगी की राहों में चलते हैं हम,
कभी खुशी तो कभी गम का सामना करते हैं हम।

कभी राहों में फूल मिलते हैं,
कभी काँटों से घायल होते हैं हम।
फिर भी चलते रहते हैं अपनी मंज़िल की ओर,
क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता।

किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता,
हर कोई अपनी मंज़िल की ओर भागता है।
कोई पीछे रह जाता है तो कोई आगे निकल जाता है,
लेकिन किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।

ज़िंदगी एक रंगमंच है,
हर कोई अपना किरदार निभाता है।
कोई हँसता है तो कोई रोता है,
लेकिन किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।

इसलिए चलते रहो अपनी राह पर,
कभी हार मत मानो।
क्योंकि अधूरे ख्वाबों का जवाब नहीं होता,
और किसी की स्वार्थपूर्ति का हिसाब नहीं होता।

डॉ. कंचन जैन ‘स्वर्णा’
सिटी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश |

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