प्रेमानंद

दिव्य संत

दिव्य संत

->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||
1.प्रेम है आनंद है,श्री राधा कृष्णा संग हैं |
तन-मन-धन-स्वांस,सब कुछ परमानंद हैं |
लता-पता-रज-व्रज गलियां,वो स्वयं वृंदावन हैं |
दिव्य अलौकिक संत महराज,नाम प्रेमानन्द है |
->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||

2.राधा कृष्णा-जन सेवा,यही उनकी पूंजी है |
सबके मार्ग दर्शक हैं,प्रभु भक्ती की कुंज्जी है |
कई वर्षों से लगातार,उपकार ही करते जाते हैं |
नाम के बल पर बैठे हैं,नाम की महिमा गाते है,
->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||

3.उनके जैसे कष्ट सहन कर,कोई नही रह पयेगा |
हार जायेंगे सोच मात्र से,रो-रो के मर जायेगा |
सच्चे भक्त भंडार ज्ञान के,ये देखो चमत्कार है |
ऐसे तपी योग संत के,दर्शन करलो बेडा-पार है |
->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||

4.वृंदावन की गलियों मे,आश्रम है राधा केली |
बसते हैं श्री प्रेमानन्द जी,राधे सरकार अलबेली |
संत सिरोमणी की बोली,स्वांस-शरीर ठाकुर जी |
शब्द-शब्द जनकल्याणी,सुनने को हम आतुर जी |
->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||

5.पाप हुआ-अपराध हुआ,जो हुआ वहीं छोड दो |
भूत का सब भूल जाओ,बर्तमान की राहें मोड लो |
नाम जपो सतकर्म करो,प्रारब्ध नष्ट को छोड दो |
रात गई तो भोर होगी,प्रेमानंद से नाता जोड लो |
->नाम जपो बात मानलो,श्री राधा राधा ||

लेखक:  सुदीश भारतवासी

Email: sudeesh.soni@gmail.com

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