मरने भी नहीं देते

मरने भी नहीं देते

वो देते हैं ज़हर मुझको मगर मरने भी नहीं देते,
बनाते हैं ताबूत, मेरी लाश बिखरने भी नहीं देते।

करूं मैं प्यार सिर्फ उनसे ये भी तो ज़िद्द है उनकी,
वो ज़ाहिर इश्क मुझको मगर करने भी नहीं देते।

वो देते रहते हैं ज़ख्म पे ज़ख्म मेरे इस सीने पर,
मगर इन ज़ख्मों को वो कभी बिसरने भी नहीं देते।

गुज़ारकर शब ग़ैर की ख़्वाबगाह में जलाते हैं मुझे,
मगर मुझको कभी भी वो आहें भरने भी नहीं देते।

वो कहते हैं रोज़ अपना चेहरा दिखा जाया करो,
मगर कभी वो अपनी गली से गुज़रने भी नहीं देते।

मैं बनकर नदी चल‌ पड़ी हूंँ मिलने उस सागर में,
वो बनकर सागर मुझे खुद में ठहरने भी नहीं देते।

वो चाहते हैं वो बने दुल्हा ‘प्रेम’ उनकी दुल्हन बने
मगर वो मुझे अपने प्यार में संवरने भी नहीं देते।

प्रेम बजाज © ®
जगाधरी ( यमुनानगर )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • रामलला | Ram Lala

    रामलला! ( Ram Lala )   रामलला का गुण गाएँ रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। दुल्हन के जैसी अयोध्या सजी है, सोने के जैसे देखो तपी है। हम भी तो सरयू नहायें रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। रामलला का गुण गाएँ रे, चलो खुशियाँ मनाएँ। झन -झन कर रही उनकी पैजनियाँ, चमचम-चमकी कमर करधनियाँ। उनके चरणों में…

  • धवल | Kavita dhawal

    धवल ( Dhawal )   हिमगिरी से हिम पिघल पिघल धवल धार बन बहता है धार धवल मानो हार नवल हिमपति कंठ चमकता है कल कल बहता सुरसरि जल राग अमर हिय भरता है दु:ख हारण कुल तारण गंगा का जल अविरल बहता है   धवल चंद्र की रजत चांदनी धरती को करती दीप्तिमान मानो…

  • अडिग | Adig

    अडिग ( Adig )    किसको कहे हम खास अपना किस पर जतायें हम विश्वास अपना हर किसी दिल में फरेब है पल रहा किस पर लगाएं हम आश अपना तोड़े हैं वही जिन्हें जोड़ा था हमने छोड़े हैं वही जिन्हें संभाला था हमने बहाये थे आंसू हमने जिनके खातिर वे हि कहते हैं ,उन्हें…

  • श्रीशैल चौगुले की कविताएं | Shrishail Chougule Poetry

    प्रेमः अमृत-नमक. नमक ने मुझे ईन्सान बनायानहि तो मै जहरिला बन जाताकिसी के प्रेम कि रुची पाकरदिल देकर जीवन युध्द जीता. कहते है विषलोक में मग्रुरीउसको पाके सच्ची दुनिया देखासारा जहर अहंम का ऊतरापहली नजर में मन को फुंकाईन्सानो में भाव होती है दिल्लगीवीषधारी को प्रेम कभी न भाँता. कारण जवानी के दो रुह एकदोष…

  • दो दिन की जिंदगानी | Do Din ki Zindagani

    दो दिन की जिंदगानी ( Do din ki zindagani )    दो दिन की जिंदगानी प्यारे झूठा यह संसार है। तन बदन है माटी का प्यारे सांसे सभी उधार है। चंद सांसों का खेल सारा पंछी को उड़ जाना है। ये दुनिया है आनी जानी आगे और ठिकाना है। माटी के पुतले को फिर माटी…

  • जीवन आदर्श | Jeevan Adarsh

    जीवन आदर्श  ( Jeevan adarsh )   मैने देखा एक छोटी सी जिंदगी की अहमियत, और इसके साथ प्रकृति की सहूलियत। मैंने देखा उस नन्हीं सी कली को खिलते, विकसित होते, जीने की आशा लिए प्रसन्नचित्त। न भविष्य का भय न अतीत की चिंता, बस कोमल पंखुड़ियों से अपनी सुन्दरता खूबसूरती और आदर्शता को लोगों…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *