ए दोस्त हम ख़ुशी के तलबगार हो गये
ए दोस्त हम ख़ुशी के तलबगार हो गये

ए दोस्त हम ख़ुशी के तलबगार हो गये

 

 

ए दोस्त हम ख़ुशी के तलबगार हो गये।

हम जिंदगी में इतनें ग़मेयार हो गये ।।

 

अब हो गया है हमसे ख़फ़ा इस क़दर सनम ।

किस बात के हम इतनें ख़तावार हो गये ।।

 

दें दें हंसी लबों पे ख़ुदा मेरे अब ज़रा।

ए रब बहुत आंखों से अश्कबार हो गये।।

 

दिल प्यार का उसी के तलबगार है बहुत ।

नैनों के तीर उसके दिल के पार हो गये ।।

 

हम रह गये हैं तन्हा पड़े गाँव में यहाँ ।

वो उम्र भर के लिए  जुदा यार हो गये ।।

 

आज़म का यार बेवफा कैसे निकल गया ।

जो छोड़ने को वो मुझे तैयार हो गये ।।

 

 

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शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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